मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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ड्रेसिंग रूम का महौल गंभीर...कोच के फैसलों को लेकर बीसीसीआई खफा

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए परिस्थितियां अब पहले जैसी नहीं रही हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के भीतर गंभीर का वह वर्चस्व और अटूट समर्थन अब कम होने लगा है जो उन्हें एक साल पहले हासिल था। बोर्ड के कुछ अधिकारियों के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम के माहौल में भी गंभीर के प्रति नाराजगी के संकेत मिले हैं जिससे उनके कार्यकाल पर दबाव साफ नजर आरहाहै। रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई के कुछ आला अधिकारियों का मानना है कि टीम को मिली हार के बाद मुख्य कोच अक्सर खिलाड़ियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस या सपोर्ट स्टाफ पर ठीकरा फोड़ देते हैं जबकि मैनेजमेंट के फैसलों की जिम्मेदारी खुद लेने से बचते नजर आए हैं। कोच के इस रवैये को लेकर ड्रेसिंग रूम के भीतर भी मतभेद की खबरें सामने आई हैं। दावा किया गया है कि कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों ने अनौपचारिक रूप से पूर्व दिग्गजों और बोर्ड सदस्यों के सामने गंभीर की कोचिंग शैली को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं।

बीसीसीआई ने शुरुआत में गंभीर को अपनी पसंद का सपोर्ट स्टाफ चुनने और फैसले लेने की पूरी छूट दी थी लेकिन बोर्ड के कई सदस्यों का मानना है कि वह इस अधिकार का सही इस्तेमाल नहीं कर पाए। दक्षिण अप्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार के बाद भी गंभीर आलोचनाओं से बच गए थे लेकिन बदलाव के दौर को लेकर दिए बयान से उनकी काफी किरकिरी हुई। कार्यकाल की शुरुआत में बदलाव की बात को खारिज करने वाले गंभीर अब हार की वजह ट्रांजिशन को बता रहे हैं जिससे बोर्ड का उन पर से भरोसा डिगा है।

ब्रिटेन के निराशाजनक दौरे और टेस्ट फॉर्मेट में टीम के खराब प्रदर्शन के बाद अब आगामी श्रीलंका दौरा गौतम गंभीर के भविष्य का फैसला कर सकता है। अगर इस सीरीज में भी भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो गंभीर की कुर्सी पर खतरा और गहरा जाएगा। हालांकि, गंभीर के पक्ष में एक बड़ी राहत की बात 2027 तक का उनका कॉन्ट्रैक्ट है। वनडे वर्ल्ड कप में सिर्फ एक साल का वक्त बचा है ऐसे में बीसीसीआई जैसा बड़ा बोर्ड जल्दबाजी में कोच हटाने के पक्ष में आमतौर पर नहीं रहता। गौतम गंभीर को पद से हटाना बीसीसीआई के लिए इतना आसान फैसला भी नहीं होगा क्योंकि भारतीय टीम के कोच का पद अत्यधिक व्यस्तता, लगातार यात्राओं और हर पल मीडिया व फैंस की कड़ी निगरानी वाला होता है। ऐसे उच्च दबाव वाले माहौल में नए और योग्य विकल्प का मिलना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 4 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 11 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें