मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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सेमीफाइनल की जीत पर बवाल अर्जेंटीना ने तोड़े फीफा के नियम?

विवादित बैनर लेकर मैदान पर पहुंचे खिलाड़ी

नई दिल्ली। अर्जेंटीना ने रोमांचक सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरे फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में जगह बना ली, लेकिन इस जीत के बाद टीम एक नए विवाद में घिरती नजर आ रही है। मैच खत्म होने के बाद खिलाड़ियों के जश्न के दौरान मैदान पर एक ऐसा बैनर दिखाई दिया, जिसने खेल से ज्यादा राजनीतिक संदेश को लेकर चर्चा छेड़ दी। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह फीफा के नियमों का उल्लंघन है और क्या अर्जेंटीना पर किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।

अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में खेले गए सेमीफाइनल में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए 2-1 से जीत दर्ज की। मुकाबले के बाद जश्न के दौरान मिडफील्डर जियोवानी लो सेल्सो के हाथ में लिखा बैनर नजर आया, जिसका अर्थ है ‘माल्विनास अर्जेंटीना का है।’ दरअसल, यह संदेश फॉकलैंड द्वीप (जिसे अर्जेंटीना में माल्विनास कहा जाता है) पर अर्जेंटीना के दावे से जुड़ा है। इसी वजह से इस बैनर को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

फीफा के नियम क्या कहते हैं?

फीफा और इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड के नियमों के अनुसार मैदान और स्टेडियम के भीतर राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेशों के प्रदर्शन पर रोक है। नियमों के मुताबिक खिलाड़ियों की जर्सी, उपकरण, बैनर, झंडे या किसी भी अन्य माध्यम से राजनीतिक संदेश देने की अनुमति नहीं है। यदि ऐसा होता है तो संबंधित टूर्नामेंट आयोजक, राष्ट्रीय फुटबॉल संघ या फीफा मामले की समीक्षा कर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, केवल किसी संदेश के दिख जाने भर से सजा तय नहीं हो जाती। हर मामले की जांच अलग-अलग आधार पर की जाती है।

आखिर फॉकलैंड विवाद क्या है?

दरअसल, फॉकलैंड द्वीप दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक ब्रिटिश ओवरसीज टेरिटरी है। अर्जेंटीना इसे माल्विनास नाम से पहचानता है और लंबे समय से इस पर अपना दावा करता रहा है। 1982 में इस द्वीप को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच 74 दिनों तक युद्ध हुआ था। युद्ध में दोनों देशों के सैकड़ों सैनिकों की मौत हुई और अंत में ब्रिटेन ने द्वीप पर दोबारा नियंत्रण स्थापित कर लिया। आज भी अर्जेंटीना इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है, जबकि ब्रिटेन का कहना है कि वहां रहने वाले लोगों को अपना भविष्य तय करने का अधिकार है और अधिकांश निवासी ब्रिटिश शासन के साथ बने रहना चाहते हैं।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 16 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 11 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें