इंदौर। मध्य प्रदेश की प्रतिभाशाली खिलाड़ी असमी रघुवंशी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए राजस्थान में संपन्न ऑल इंडिया टेलेंट सीरीज टेनिस टूर्नामेंट में दोहरी सफलता हासिल की। असमी ने एकल और युगल दोनों वर्गों में ट्रॉफी हासिल करते हुए पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया।
साजिद लोदी टेनिस अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली असमी ने जयपुर के ड्रीम हाउस क्लब में आयोजित इस टूर्नामेंट में अपने आक्रामक खेल, झन्नाटेदार सर्विस और बेहतर रणनीति से देशभर की विपक्षी खिलाड़ियों को परेशान किया। असमी ने अपने एकल अभियान की शुरुआत राजस्थान की नैशा चिल्लर के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले से की। पहले ही मैच में असमी ने अपनी तेजी से राजस्थान की खिलाड़ी को परेशान करते हुए यह मुकाबला 7- 5, 6-2 से अपने नाम किया। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में राजस्थान की ही खुशवी पाढियार को 6-3, 6-2 से और सेमीफाइनल में राजस्थान की सिल्वी पाल को 7-5, 6-2 से हराकर खिताबी मुकाबले में कदम रखा। फाइनल में असमी का सामना गुजरात की अनुभवी खिलाड़ी माही राउलजी से हुआ। इस मैच में असमी ने संयमित खेल दिखाते हुए विपक्षी खिलाड़ी को गलतियां करने पर मजबूर किया। असमी के सामने माही खास चुनौती पेश नहीं कर सकीं और मध्य प्रदेश की बेटी ने यह मुकाबला 6-3, 6- 1 से अपने नाम करते हुए ट्राफी हासिल की।
इसके बाद असमी ने महिला युगल वर्ग में राजस्थान की एस. पाल के साथ जोड़ी बनाई। इस जोड़ी को क्वार्टर फाइनल में कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा। अपने बेहतर तालमेल की बदौलत असमी और पाल की जोड़ी ने मध्य प्रदेश की अवनी जाट और उत्तर प्रदेश की आइरा को 4-6, 6-1, 12-10 से हराया। इसके बाद उन्होंने गुजरात की माही राउलजी और राजस्थान की एस. चौधरी की जोड़ी को सेमीफाइनल में 6-2, 6-1 से आसानी से पराजित किया। खिताबी मुकाबले में इनका सामना गुजरात की डी. ब्रह्मभट्ट और सारा रियाज की जोड़ी से हुआ। असमी और पाल की जोड़ी ने अपने खेल के स्तर को बहुत ऊपर उठाते हुए विपक्षी जोड़ी को कोई मौका नहीं दिया और यह मैच आसानी से 6- 2, 6-1 से जीतते हुए ट्राफी हासिल की। यह असमी का स्पर्धा में दूसरा खिताब था। कोलंबो। पिछले 15 वर्षों में कई मौकों पर श्रीलंका ने घरेलू मैदानों पर स्पिन गेंदब़ाजों के लिए बेहद अनुकूल पिचें तैयार की हैं, लेकिन मुख्य कोच गैरी कर्स्टन चाहते हैं कि आगे आने वाली सीऱीज में उसी तरह की पिचें तैयार की जाएं, जैसा भारत और श्रीलंका के बीच खेली गई सीऱीज के दौरान थीं।
इस सीऱीज के दौरान कुल 67 विकेट गिरे, जिसमें से त़ेज गेंदब़ाजों ने 24 विकेट लिए। श्रीलंका के लिए असिता फर्नांडो सबसे सफल गेंदब़ाज रहे। उन्होंने 20 की औसत से 10 विकेट लिए और सीऱीज में कुल मिलाकर दूसरे सबसे सफल गेंदब़ाज रहे। पिचें बल्लेब़ाजी के लिए भी अच्छी थीं, जहां दोनों टीमों ने तीन-तीन शतक लगाए। सोनल दिनुशा ने तीन, देवदत्त पडिक्कल ने दो और ध्रुव जुरेल ने एक शतक जड़ा। दोनों टेस्ट पांचवें दिन तक पहुंचे, जबकि इससे पहले श्रीलंका में कई सीऱीज धूलभरी पिचों पर स्पिनरों के कहर के कारण जल्दी ख़त्म हो जाती थीं। कर्स्टन का मानना है कि स्पोर्टिंग विकेट ही ऐसे क्रिकेटर तैयार करती हैं, जिनमें टेस्ट क्रिकेट में सफल होने के लिए जरूरी कौशल और धैर्य विकसित होता है। कर्स्टन ने कहा, मैं इस बात का बड़ा समर्थक हूं कि हम स़िर्फ स्पिनरों के लिए पिचें तैयार न करें। हम ऐसी पिचें चाहते हैं जहां हमारे त़ेज गेंदब़ाज भी हमें मैच जिता सकें। इसी तरह से एक अच्छी क्रिकेट टीम विकसित होती है। हर तरह की परिस्थितियों में खेलकर टीमें बेहतर बनती हैं। टेस्ट सीऱीज के लिए तैयार की गई दोनों पिचों से मैं बेहद प्रभावित था। इन पिचों पर नतीजा हासिल करने के लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है। ये उस तरह की पिचें नहीं थीं, जहां तुरंत नतीजा निकल जाए। उन्होंने आगे कहा- हम चाहते थे कि हमारे बल्लेब़ाज बल्लेब़ाजी कर सकें। स्पिनरों को मेहनत करनी पड़े और त़ेज गेंदब़ाज भी खेल में बने रहें। गॉल टेस्ट की दूसरी पारी में हमारे त़ेज गेंदब़ाजों ने दस में से सात विकेट लिए थे। यह देखकर मैं बेहद उत्साहित हूं कि हमारे त़ेज गेंदब़ाज खेल में प्रभाव डाल रहे हैं और मैं इसे आगे और विकसित करना चाहता हूं। हालांकि, इस सीऱीज के सबसे बड़े सितारे सोनल दिनुशा रहे। कर्स्टन ने एसएससी में पांचवें दिन उनके संघर्षपूर्ण शतक को श्रीलंका के टेस्ट इतिहास की महान पारियों में से एक बताया। कर्स्टन ने कहा, चौथे और पांचवें दिन उन्होंने जो पारी खेली, वह श्रीलंका के टेस्ट इतिहास में सबसे बेहतरीन बचावों में से एक मानी जाएगी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 29 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 10 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




