नई दिल्ली। भारतीय टीम के पू्र्व क्रिकेटर और कोच रवि शास्त्री ने 10 साल बाद कोच पद से हटाए जाने पर चुप्पी तोड़ी है। पूर्व भारतीय कप्तान शास्त्री 2014 में भारतीय टीम के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट बने थे। 2 साल बाद, बीसीसीआई ने इस पद को समाप्त करने का फैसला किया और शास्त्री को मुख्य कोच के पद के लिए आवेदन करने को कहा। नया कोच चुनने की जिम्मेदारी बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति के ऊपर थी। इस समिति में सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण शामिल थे और इस समिति ने शास्त्री की अनदेखी करते हुए अनिल कुंबले को टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया। इसके बाद शास्त्री ने खुलासा किया कि हेड कोच पद के लिए जब उनका इंटरव्यू हुआ तब सौरव गांगुली वहां मौजूद नहीं थे। इससे बवाल खड़ा हो गया। शास्त्री ने कहा कि इस घटना से उन्हें अपमानित महसूस हुआ। बाद में गांगुली ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शास्त्री के निजी हमले से उन्हें बहुत दुख हुआ। रवि शास्त्री ने क्या बताया? — रिपब्लिक टीवी के साथ बातचीत में रवि शास्त्री ने कहा, 2014 में मैंने कमान संभाली। मैं टीम का डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट था। 2016 में उन्होंने कहा, नहीं, हमें अब किसी निदेशक की जरूरत नहीं है। आप मुख्य कोच पद के लिए आवेदन करें। मुझे योग्यता के आधार पर पद से हटाने का कोई कारण नहीं था। इसकी वजह कुछ और थी। इससे मुझे बहुत दुख हुआ। सच में, मुझे बहुत तकलीफ हुई। अगर मैं अपने करियर पर नजर डालूं, तो मुझे बहुत दुख हुआ क्योंकि आपने टीम को उस मुकाम तक पहुंचाने के लिए अपना दिल-जान लगा दिया था और आप देख सकते थे कि कुछ ही समय में उसके परिणाम दिखने लगे थे। और फिर आपको जाकर बाहर बैठना पड़ा।
दूसरे टर्म में मजबूत होकर लौटे शास्त्री- रवि
शास्त्री ने कहा, फिर मैं कमेंट्री पर लौट आया और खेल जारी रखा। मैंने कहा, ठीक है, डेढ़ साल का यह अनुभव अच्छा रहा। इसने मुझे बहुत कुछ सिखाया। इसने मुझे ड्रेसिंग रूम में वापस ला खड़ा किया।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 9 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 11 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




