बिजासन रोड पर चल रहे श्वेताम्बर जैन समाज के चातुर्मास प्रवचन में संत सिद्धरत्न विजय म.सा. ने कहा कि युवाओं को भोग में नहीं बल्कि धर्म आराधना में लगाए। सभी को आत्म चिंतन, संयम, धर्म आराधना करना चाहिए। आत्म कल्याण की दिशा में भी सभी को लगना चाहिए। बाल्यावस्था निष्कपटता और सरलता से भरी होती है, जबकि वृद्धावस्था में इच्छाएं सीमित होने लगती हैं। इसके विपरीत युवावस्था में मनुष्य अहंकार, मोह, राग-द्वेष और सांसारिक आकर्षण में सबसे अधिक उलझता है। इसलिए युवावस्था में सावधान रहने की आवश्यकता है। कल सातवें उपवास का पारणा के लाभार्थी विनोद संघवी, अनिल संघवी, अर्पित संघवी थे। कल 36 श्रद्धालुओं ने पारणा किया, जिसके लाभार्थी सुनंदा बाबूलाल जैन मामा रहे। 100 उग्र तपस्वियों की तपस्या जारी है। निखिल इमलीवाला के 28, कल्पना अजीत नांदेचा के 22, अंगूरबाला अजीत मेहता के 28, वंशिका अंकित बागवाला 22, गौतम जैन 22 उपवास कर रहे हैं। वहीं 44 दिवसीय कठिन सिद्धि तप की आराधना अंतिम नरेन्द्र राठौर कर रही है। आज सुबह पर्युषण महापर्व शुरू हुआ। आज सुबह संत के प्रवचन सुने गए। शाम को प्रभु भक्ति भी होगी। उक्त जानकारी राजेश-प्रिया जैन युवा ने दी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 8 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 7 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें






