केशरी वाटिका एयरपोर्ट रोड पर चल रहे श्री सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ, इंदौर के चातुर्मासिक प्रवचन में जैन संत सिद्धरत्न विजय म.सा. एवं विद्वदरत्न विजय म.सा. ने धर्मसभा को संबोधित किया। संत ने अलग- अलग प्रेरक प्रवचन दिए। पर्यूषण पर्व में तप अराधना का महत्व भी बताया और प्रेरणा भी दी। मृत्यु निश्चित है, लेकिन वह किसी आहट या सूचना के साथ नहीं आती। व्यक्ति सोते, बैठते, चलते या बात करते हुए भी संसार से विदा हो सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि जीवन का कोई भी क्षण निश्चित नहीं है। उन्होंने आत्मा, शरीर और मकान की अस्थायित्व की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि वास्तव में ‘मैं’ आत्मा हूं और शरीर आत्मा का निवास है। जब सब कुछ अस्थायी है तो जीवन के उद्देश्य और परिणाम को समझकर कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने धर्मक्रियाओं को भी समझकर करने पर जोर दिया। प्रतिक्रमण, सामायिक, पूजा और गुरुवंदना जैसी क्रियाएं केवल परंपरा अथवा औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि आत्मकल्याण के लिए हैं। जब तक धर्मक्रिया के वास्तविक उद्देश्य को समझकर भावपूर्वक नहीं किया जाएगा, तब तक उसका पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं हो सकता। बडी संख्या में जैन समाजजन मौजूद रहे। भाई-बहनों के उपवास भी जारी है। कई तपस्याएं भी पूर्ण हुई है। सिद्धि तप में भी आराधना हो रही है। उक्त पूर्ण जानकारी मीडिया समन्वयक राजेश जैन युवा ने दी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 4 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 6 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें






