पिछले साल अक्टूम्बर से तैयार साढ़े आठ करोड़ से ज्यादा की लागत से देवास नाका के पास तलावली चांदा क्षेत्र में बनी प्रदेश की तीसरी आधुनिक फूड एंड ड्रग लैब में सालभर बाद भी सेम्पलों की जांच शुरू नहीं हो पाई। जबकि प्रदेश की आर्थिक राजधानी और खानपान के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर को मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए शासन द्वारा यहां लगभग चार साल से भी ज्यादा समय में अत्याधुनिक फूड एंड ड्रग लैब का निर्माण किया गया था, लेकिन बावजूद अभी तक जांच शुरू नहीं की गई। गौरतलब है कि पिछले साल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने खुद अक्टूबर 2025 में 8.50 करोड़ रुपये की लागत से तलावली चांदा स्थित नवीन लैब का लोकार्पण किया था, लेकिन अब हालत यह है कि सालभर बीत जाने के बाद भी सैंपल जांच शुरू नहीं हो सकी है। इधर इसी माह 11 अक्टूम्बर से नवरात्रि ओर फिर अगले माह दीपावली शुरू हो रही है। जिसमें हजारों क्विंटल की बड़ी तादात में मिठाई की खपत होगी। ऐसे में अभी भी यहां से खाद्य सेम्पल जांच के लिए भोपाल भेजने पड़ रहें है। बड़ी बात यह है कि देवास नाका क्षेत्र में तैयार आधुनिक बहु मंजिला भवन में नवीन लैब में अत्याधुनिक उपकरण भी स्थापित हो चुकें है और आठ सदस्यीय स्टाफ भी तैनात कर दिया गया है। इसके बावजूद एनएबीएल (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) का प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण प्रयोगशाला संचालन शुरू नहीं हो पाया है। जिसके कारण इंदौर और आसपास के जिलों से लिए जा रहे खाद्य एवं औषधि नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।
मिलावट के मामले लगातार आ रहे सामने
जबकि शहर में लगातार खान पान के पदार्थों में मिलावट के मामले रोजाना सामने आ रहे है। आटा, तेल, घी,दूध, दही से बने उत्पाद के साथ अन्य सामग्री में लगातार मिलावट के मामले सामने आ रहे है। जबकि पिछले साल
और अधिकारियों ने लैब को मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का मजबूत हथियार बताया था। यही नहीं दावें भी किए जा रहे थे, कि इससे जांच प्रक्रिया तेज होगी, और दोषियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी, लेकिन हकीकत में अभी आम लोगों को इसका कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं वर्तमान में इंदौर में मिलावट के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। यहां तेल,मसाले, दूध, घी और अन्य खाद्य सामग्री आइसक्रीम सहित अन्य खान पान की च़ीजों में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
14 दिन की धारा, महीनों तक नहीं आती रिपोर्ट— खाद्य
सुरक्षा विभाग द्वारा लिए जाने वाले खाद्य पदार्थ के सैंपलों की रिपोर्ट भोपाल से आने में कई बार महीनों का समय लग जाता है। इस देरी का सीधा फायदा मिलावटखोरों को मिलता है। रक्षाबंधन, दीपावली जैसे बड़े त्योहारों में मिठाइयां खप जाती हैं, लेकिन रिपोर्ट ही नहीं आ पाती है। लैब शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा ही यहीं मिलेगा कि रिपोर्ट जल्दी आ सकेगी। वहीं अब खाद्य आधिकारी दीपावली से पहले जल्द लैब शुरू करवाने का दावा कर रहें है, लेकिन दावों का क्या दावे हकीकत बन पाएंगे, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 5 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें






