आचार्य विजय नित्यसेनसूरीश्वरजी म.सा. ने मांगलिक श्रवण कराते हुए धर्मालुजनों को नवकार महामंत्र की आराधना का प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र का जाप केवल मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण की साधना है। आचार्यश्री ने नवकार आराधना के नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि नौ दिनों तक श्रावक-श्राविकाएँ श्वेत वस्त्र धारण करेंगे, जहाँ भी बैठें वहीं 20 मालाओं का जाप करेंगे तथा एक बैठक में कम से कम पाँच मालाएँ पूर्ण करेंगे। उन्होंने प्रतिदिन तीन बार देववंदन करने, यथासंभव मौन रखने तथा सामूहिक आराधना में पूर्ण श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के साथ सहभागी बनने का आह्वान किया। आचार्य के दर्शन करने अहमदाबाद से वाघ वोहरा भी आए। प्रशमसेनविजयजी म.सा. ने पुण्यसम्राट की गाथा 'युग प्रभावक' का वाचन किया। मीडिया समन्वयक राजेश जैन युवा ने जानकारी देते हुए बताया कि धर्मसभा में बाहर से भी बडी संख्या में वरिष्ठ समाजसेवी भी पहुंचे। मुकेश नाकोडा, वाघ वोहरा, हीराभाई, विपिन भाई का बहुमान वीरेन्द्र लुंकड़, धनराज संघवी, नीरज सुराणा ने किया। इस अवसर पर महेन्द्र बागवाला, नीरज सुराणा, राजेश जैन युवा, मुकेश पोसित्रा, मोहनलाल पारेख, विवेक जावरा, आशीष पारख, हेमंत पारेख, दीपक सगरावत एवं देवेंद्र वया भी मौजूद रहे।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 7 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें






