श्री सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ, इंदौर के तत्वावधान में विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने बारसासूत्र का श्रवण, प्रवचन, सामायिक, साधर्मिक भक्ति, जीवदया एवं चैत्य परिपाटी सहित विभिन्न आराधनाओं में जैन समाजजनों ने भाग लिया। इस अवसर पर मुनि विद्वदरत्न विजय एवं मुनि प्रशमसेन विजय ने अनवरत तीन घंटे से अधिक समय तक खड़े रहकर बारसासूत्र का वांचन किया। 500 से अधिक आराधक सामायिक के वस्त्रों में उपस्थित रहे। समस्त महिलाओं ने भी सामायिक में रहकर सूत्र श्रवण किया। उक्त जानकारी राजेश जैन युवा ने दी और यह भी बताया कि तपस्वियों का पारणा आज सुबह से प्रारम्भ हुआ। महासती साध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. के प्रवचन का विषय ‘क्षमापना एवं संवत्सरी का महत्व’ रहा। उन्होंने संवत्सरी को आत्मावलोकन और आत्मशुद्धि का पर्व बताते हुए कहा कि यह दिन पूरे वर्ष में हुए ज्ञात-अज्ञात अपराधों पर विचार करने, मन- वचन-काय से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगने और दूसरों को क्षमा करने का अवसर प्रदान करता है। क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि मन के भीतर से वैर और द्वेष को समाप्त करने की साधना है। वहीं साध्वी श्री महाप्रज्ञाजी म.सा. ने भी धर्मसभा को संबोधित कर संवत्सरी के आध्यात्मिक भावों से श्रद्धालुओं को जोड़ा। कालसर्प योग महामंगलकारी अनुष्ठान के पोस्टर का विमोचन किया गया। साध्वी डॉ. श्री पद्मकीर्तिजी म.सा. ने अंतकृत दशांग सूत्र का वाचन किया। प्रकाश जैन भटेवरा, अचल चौधरी, डिपीन जैन, डॉ. राजीव चौधरी, रमेश भंडारी, राजेश मेहता मौजूद थे।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 16 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें






