हुचर्चित खौफनाक नीले ड्रम हत्याकांड का के फैसले में बुधवार को सौरभ की पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल शुक्ला को मुस्कान के पति सौरभ की हत्या का दोषी करार देते हुए जिलान्यायाधीश अरविंदकुमार मिश्र ने मौत की सजा सुनाते समय महाभारत के श्लोक का जिक्र करते हुए कहा कि अधर्म के काम की सजा देना भी धर्मं ही होता हैं। एक बच्ची की माँ मुस्कान ने बीते वर्ष अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर अपने ही पति सौरभ राजपूत को को टुकड़ों में काट कर नीले ड्रम में भर कर उसे सीमेंट से ढंककर पूरे देश को झकझोर दिया था। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड की सबसे खास बात यह है कि मुस्कान और सौरभ राजपूत ने प्रेम विवाह किया था और हत्या की सूचना भी मुस्कान ने ही अपने माता पिता को दी थी। सूचना प्राप्त करने के बाद मुस्कान के पिता ने ही सौरभ की हत्या की सूचना पुलिस को थी। पहले पति की हत्या करना फिर बिना डर के खुद उसकी हत्या की सूचना अपने माता पिता को देना नासमझी में किया गया कृत्य नहीं कहा जा सकता। मुस्कान द्वारा प्रेम विवाह करने के बाद अपने पति की हत्या करना हमारे समाज के गिरते नैतिक मूल्यों और सामाजिक संस्कारो और स्वयं की घिनौनी हरकत का असहनीय दृश्य समाज के सामने प्रस्तुत करता है जीवदया अहिंसापरमोधर्म के मूल मंत्र मानने वाले समाज में एक पत्नी के द्वारा अपने प्रेमी के लिए परिणाम की चिंता किये बिना प्रेमविवाहित पति की हत्या करना हमारे मानसिक पतन को दर्शाता हैं। पति को परमेश्वर मानने वाली हमारी सनातन संस्कृति में इस घटना ने सभी को झकझोर दिया था। हमारे समाजशास्त्रियों मनोवैज्ञानिको के लिये यह घटना शोध का विषय हो सकती हैं। ऐसा क्या हो जाता हैं कि एक बेटी की माँ अपने ही पति की हत्या कर बेटी के सिर से पिता का साया छीन लेती हैं। अपने पति की हत्या की सूचना भी स्वयं ही देती हैं, और अपनी ही बेटी को अनाथ से जीवन जीने को मजबूर कर देती हैं। जो भी अपने पति की हत्या की इस घटना सही नहीं ठहराया जा सकता इस प्रकार की घटना हमारे सामाजिक मूल्यों और नैतिक जिम्मेदारी को और नीचे ले जाने का काम करती हैं। -मुकेश नागर
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 15 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



