2 हजार से अधिक के पात्र यूपीआई मर्चेंट लेन-देन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (व्यापारी से लिया जाने वाला भुगतान शुल्क) लागू होने की व्यवस्था ने व्यापारियों के बीच नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार के अनुसार यह शुल्क ग्राहक से नहीं, संबंधित व्यापारी से लिया जाएगा और 75 हजार या उससे अधिक के लेन- देन पर इसे 300 तक सीमित किया गया है। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन, मारोठिया बाजार व्यापारी संघ के सचिव अंकुश जैन और क्लाथ मार्केट व्यापारी एसोसिएशन के मंत्री कैलाश मूंगड ने कहा कि व्यापारियों की आपत्ति केवल शुल्क की दर को लेकर नहीं है, बल्कि इसकी व्यावहारिक प्रक्रिया को लेकर भी है। अक्षय जैन ने कहा कि मान लीजिए ग्राहक ने 20 हजार की खरीदारी यूपीआई से की। व्यापारी के खाते से मर्चेंट शुल्क कट गया और बाद में ग्राहक ने पूरा सामान वापस कर दिया। ऐसी स्थिति में व्यापारी को पूरा 20 हजार वापस करना होगा, लेकिन पहले कटे शुल्क का क्या होगा? रिफंड के साथ व्यापारी को यह शुल्क भी स्वतः वापस मिलेगा या इसके लिए अलग प्रक्रिया अपनानी होगी, यह स्पष्ट होना चाहिए। अंकुश जैन ने कहा कि कपड़ा बाजार जैसे कारोबार में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है। व्यापारी हर अतिरिक्त लागत को कीमत में जोड़कर ग्राहक पर नहीं डाल सकता। ‘कमाई का प्रतिशत बढ़ाना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अपने ही पैसे के लेन-देन पर अक्षय जैन, अंकुश जैन और कैलाश मूंगड बोले-कम मार्जिन के कारोबार में 0.4प्रतिशत अतिरिक्त लागत भी महत्वपूर्ण, पहले रिफंड की व्यवस्था स्पष्ट हो व्यापारी अपनी जेब से अतिरिक्त शुल्क क्यों दे?’ वास्तविक समस्याओं और रिफंड जैसी स्थितियों कैलाश मूंगड ने कहा कि व्यापारियों को रिफंड, का समाधान स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने आंशिक रिफंड, ऑर्डर रद्द होने और विवादित कहा कि व्यापारी विरोध के लिए मन बना चुके हैं, लेकिन उनकी मांग स्पष्ट है डिजिटल भुगतान व्यवस्था मजबूत हो, पर उसकी लागत का बोझ बिना स्पष्ट व्यवस्था के सीधे व्यापारी के मुनाफे पर न डाला जाए। सरकार का कहना है कि लगभग 96 प्रतिशत व्यापारिक यूपीआई लेन-देन नए शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे और निर्धारित श्रेणी में छोटे कारोबारियों के लिए शून्य शुल्क की व्यवस्था जारी रहेगी। व्यापारियों का सवाल अब यही है बिक्री हुई तो शुल्क व्यापारी दे और बिक्री वापस हुई तो शुल्क का क्या होगा? इस एक सवाल का स्पष्ट जवाब मर्चेंट शुल्क व्यवस्था लागू होने से पहले जरूरी है। भुगतान जैसी परिस्थितियों में मर्चेंट शुल्क के समायोजन की स्पष्ट और स्वचालित व्यवस्था चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की मौजूदा व्यवस्था में यूपीआई से जुड़े विवादों और भुगतान वापसी के लिए प्रक्रियाएं हैं, लेकिन नए व्यापारी शुल्क के रिफंड के साथ समायोजन की व्यावहारिक प्रक्रिया व्यापारियों के लिए स्पष्ट किया जाना जरूरी है। तीनों व्यापारिक नेताओं ने कहा कि यूपीआई डिजिटल कारोबार की महत्वपूर्ण सुविधा बन चुका है और व्यापारी भी इसके विस्तार में सहभागी रहे हैं। इसलिए नई शुल्क व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापारियों की
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 21 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 10 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें


