मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा ओबीसी का 27 प्रतिशत आरक्षण निरस्त किए जाने के बाद भाजपा सरकार और संगठन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया ने कहा कि अब भाजपा का नया पैंतरा सामने आया है।
खबरें आ रही हैं कि मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से चर्चा के बाद भाजपा संगठन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। चौरसिया ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, मुख्यमंत्री मोहन यादव सत्ता में हैं और सरकारी वकीलों के माध्यम से अदालत में पक्ष रखने की जिम्मेदारी सरकार की है, तब ओबीसी आरक्षण की लड़ाई भाजपा संगठन लड़ेगा—यह बयान अपने आप में हास्यास्पद है। सरकार आखिर किस बात के लिए है? जो काम सरकार को करना चाहिए, उसके लिए अब संगठन को आगे करने की बात क्यों कही जा रही है? उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पहले यह बताए कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के पक्ष में अदालत में प्रभावी पैरवी करने और पर्याप्त तथ्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी किसकी थी। यदि सरकार अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाई, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार की नाकामी पर पर्दा डालने के लिए संगठन को आगे करना और पिछड़े वर्ग को नई उम्मीदों के नाम पर भ्रमित करना राजनीतिक पैंतरेबाजी के अलावा क्या है? चौरसिया ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नेताओं के पुराने बयानों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सितंबर 2015 में तत्कालीन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण नीति की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का सुझाव दिया था, जिसके बाद देशभर में आरक्षण के भविष्य को लेकर बहस छिड़ी थी। उन्होंने कहा कि जब भी आरक्षण और सामाजिक न्याय का सवाल उठता है, भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि वह पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए वास्तव में कितनी प्रतिबद्ध है। एक तरफ पिछड़ों के हितों की बात करना और दूसरी तरफ 27 प्रतिशत आरक्षण की कानूनी लड़ाई में सरकार की भूमिका पर सवाल उठना, भाजपा की कथनी और करनी के बीच अंतर को उजागर करता है। चौरसिया ने कहा कि पिछड़े वर्ग के युवा अब केवल आश्वासन नहीं, जवाब चाहते हैं। उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके आरक्षण की रक्षा के लिए सरकार ने क्या किया, अदालत में कौन-से तथ्य रखे गए और आगे की रणनीति क्या है। अमित चौरसिया ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि सरकार तत्काल विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर चर्चा कराएं।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 15 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें





