प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने म.प्र. के चुनाव आयोग से सवाल कर प्रश्न उठाया कि मप्र के विभिन्न हिस्सों में जिलों में विधानसभा क्षेत्रों में बूथ लेबल अधिकारियों से वोटर लिस्ट में नाम हटाने वाले फार्म-7 किस तरह भाजपा कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न व्यक्तियों के पास पहुंचे एक समान छपें एवं भरें गये।
फार्म पर नकली हस्ताक्षर किए गए और बड़ी संख्या में जब शिकायतें दर्ज कराई गई तो दोषी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक धाराओं के मामले में दर्ज क्यों नहीं किए गए तथा यह जांच क्यों नहीं की गई कि चुनाव आयोग के उपयोगी दस्तावेज बाहरी लोगों के पास कैसे पहुंचे। द्विवेदी ने यह भी पूछा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने वाले फार्म- 7 किस तरह से बाहरी लोगों के पास गये उन्होंने नकली हस्ताक्षर किए और जमा हुए ये एक बड़ी साजिश थी। मप्र में हजारों लोगों के नाम कटवाने का खेल हुआ। मप्र का निर्वाचन आयोग पूरे प्रदेश में हुए खेल की जानकारी दे तथा जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने गंभीर आपराधिक मामले में चुप्पी क्यों साधे रखी इन सबका जबाब वे स्वयं दें। द्विवेदी ने उक्त प्रश्न चुनाव आयोग से पूछा और बताया कि इंदौर में पार्षद पति साजिद खान से लेकर अन्य ने मामले में शिकायत दर्ज कराई थी तो टोंक खुर्द ब्लाक अंतर्गत भौरासा थाने में संवरसी गांव के लोगों ने तो अन्य जगहों पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। उक्त पूर्ण जानकारी प्रमोद द्विवेदी ने दी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 15 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें





