उच्चतम न्यायालय व्दारा एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पूरे देश के सभी नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत एवं जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं कि ऐसे क्षेत्र जो आवासीय योजना के है मंजूरी आवासीय है लैंड यूज आवासीय है और उसपर व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही है इन पर कार्यवाही की जाए। मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एड्वोकेट प्रमोद कुमार व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि इसपर इंदौर विकास प्राधिकरण, गृह निर्माण मंडल तथा नगर निगम एवं जिला कलेक्टर कार्यालय सबसे पहले अपनी अपनी योजनाओं पर कार्यवाही करके अंजाम दे तथा उच्चतम न्यायालय आदेश निर्देश का पालन करें। व्दिवेदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि गृह निर्माण मंडल, विकास प्राधिकरण, नगर निगम एवं कलेक्टर कार्यालय व्दारा जो संपत्तियां लीज पर दी गई है और आवासीय लीज पर दी गई है योजना आवासीय है तो सबसे पहले इन्हें उच्चतम न्यायालय आदेश का पालन करते हुए ऐसे निमार्ण पर कार्यवाही करना चाहिए। व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि इंदौर में गृह निर्माण मंडल, विकास प्राधिकरण,नगर निगम एवं कलेक्टर कार्यालय ने जिन योजनाओं को विकसित किया है जैसे एलआईजी, एमआईजी, सुखलिया, स्कीम नंबर 74, 78, 54, 114, 94, से लेकर अन्य तो नगर निगम की पलासिया,साऊथ तुकोगंज, रेसकोर्स रोड,आदि तो कलेक्टर कार्यालय ने कुछेक गृह निर्माण संस्थाओं को जमीन लीज पर दी है जैसे रेवेन्यू नगर, स्वस्तिक नगर, जनशक्ति नगर आदि सबसे पहले यहां कार्यवाही करें। लीज शर्तें पालन ना करने पर नोटिस जारी करें तथा संबंधितों को नोटिस जारी करें पश्चात् लीज निरस्त करके मनी सेंटर को जिस तरह जमीदौज किया इन्हें भी करें और अन्य को नये सिरे से लीज आवंटन करें। व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि मनी सेंटर पर की गई कार्यवाही अगर जायज थी तो फिर अब तो उच्चतम न्यायालय आदेश निर्देश जारी कर चुका है और इसका उल्लेख करके कार्यवाही की जाए।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 30 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




