सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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एसआईआर पर सवाल: मतदाता सूची से नाम छूटने की चिंता के बीच आयोग के सामने नई चुनौती

कतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का अर्थ केवल सत्ता का चयन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में किसी पात्र नागरिक को तकनीकी…

कतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का अर्थ केवल सत्ता का चयन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में किसी पात्र नागरिक को तकनीकी कारणों का हवाला देकर मतदाता सूची से बाहर करना वैध रूप में उसके अस्तित्व को नकारने जैसा है। देश में मतदाता सूची को दुरुस्त और अद्यतन करने के उद्देश्य से शुरू किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर अब कई उलझनों और सवालों के घेरे में है। जिस प्रक्रिया का मकसद पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करना और अपात्र नामों को हटाना है, वही आम नागरिकों के लिए परेशानी और चिंता का कारण बन गई है। मताधिकार लोकतंत्र की पहचान है और अगर बड़ी संख्या में नागरिकों का यही अधिकार छिन जाए, तो चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हाल ही में आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर जिस तरह की खबरें सामने आई हैं, उससे उसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता की साख भी दांव पर है। सड़क से लेकर अदालत तक में चुनाव आयोग से सवाल पूछे जा रहे हैं। इसी क्रम में बंबई उच्च न्यायालय ने बीते गुरुवार को कहा कि जब आयोग मतदाताओं के आचरण पर सवाल उठाता है, तो नागरिकों को भी यह पूछने का अधिकार है कि चौबीस साल बाद एसआइआर क्यों कराया जा रहा है! लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का अर्थ केवल सत्ता का चयन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में किसी पात्र नागरिक को तकनीकी कारणों का हवाला देकर मतदाता सूची से बाहर करना वैध रूप में उसके अस्तित्व को नकारने जैसा है। एसआइआर की प्रक्रिया में कई तरह की जटिलताएं हैं, जिनमें मतदाताओं के लिए पुराने रिकार्ड के आधार पर अपनी पहचान और पात्रता साबित करने की चुनौती प्रमुख है। देश भर में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हो सकते हैं, जिनके पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध न हों। ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब परिवारों, बुजुर्गों और प्रवासी मजदूरों के लिए इस तरह के जरूरी कागजात जुटाना आसान नहीं होता है। कई बार लोगों के नाम, पते और जन्मतिथि में मामूली अंतर भी उन्हें मतदाता सूची से हटाने का कारण बन जाता है। बंबई उच्च न्यायालय ने भी इस चिंता को रेखांकित करते हुए कहा है कि निर्वाचन आयोग का प्रयास ऐसी मतदाता सूची तैयार करना होना चाहिए, जिसमें अधिकतम पात्र मतदाता शामिल हों। इस उद्देश्य के लिए आयोग को हर तरह के उपाय करने चाहिए। मगर स्थिति इसके विपरीत नजर आती है, क्योंकि देश भर में अब तक तेरह करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं। खबरों के मुताबिक, एसआइआर पर व्यापक चिंता और सवालों के बीच चुनाव आयोग अब सूची से बाहर हो गए लोगों की नए सिरे से तलाश शुरू करेगा। पुनरीक्षण में जो नाम स्थानांतरण, आवास पर नहीं मिलने, फार्म जमा न होने या अन्य तकनीकी कारणों से छूट गए हैं, उनका पता लगाकर उन्हें अपनी पात्रता साबित करने का फिर से मौका दिया जाएगा। मगर यह सवाल अब भी अपनी जगह कायम है कि क्या मतदाता सूची से बाहर किए गए सभी पात्र नागरिकों की बहाली हो पाएगी?

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 4 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें