मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार द्वारा सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह छात्रों के लंबे संघर्ष, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के सतत आंदोलन और न्यायपालिका के हस्तक्षेप की जीत है। चौरसिया ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव बंद कर दिए गए थे। पिछले आठ वर्षों में प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक नेतृत्व चुनने के अधिकार से वंचित रखा गया। एनएसयूआई ने लगातार छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग उठाई, अनेक आंदोलन किए, ज्ञापन सौंपे, धरना-प्रदर्शन किए और हजारों छात्र कार्यकर्ताओं पर एफआईआर तक दर्ज की गईं। अब जबकि सरकार ने हाईकोर्ट में चुनाव कराने का आश्वासन दिया है, उन सभी आंदोलनकारियों पर दर्ज प्रकरण तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं। चौरसिया ने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएं, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतांत्रिक तरीके से अपने प्रतिनिधि का चुनाव कर सके। किसी भी प्रकार की अप्रत्यक्ष या नामांकन आधारित व्यवस्था लोकतांत्रिक भावना के विपरीत होगी। अमित चौरसिया ने कहा कि हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट कर दिया है कि कानून- व्यवस्था का बहाना बनाकर चुनाव टाले नहीं जा सकते। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया हर हाल में संपन्न हो। यह निर्णय प्रदेश के नौ विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध सैकड़ों महाविद्यालयों के लाखों विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा करने वाला है। उन्होंने भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सरकार कहती कुछ है और करती कुछ और है। यदि सरकार वास्तव में छात्र हितैशी है तो वह तत्काल चुनाव कार्यक्रम घोषित करे, स्पष्ट समय-सारिणी जारी करे और प्रत्यक्ष प्रणाली से निष्पक्ष एवं पारदर्शी छात्रसंघ चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करे।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 5 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




