विगत दिनों विधानसभा में कांग्रेस के 60 विधायकों द्वारा धरना दिया गया था और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय उनसे मिलने भी पहुंचे थे। छात्रों के विरुद्ध आपत्तिजनक मंत्री की टिप्पणी का हवाला नेताप्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेसी विधायकों ने दिया था जिसे मंत्री ने सिरे से खारिज किया था। इन्हीं बयानबाजी के बीच पाण्डे दम्पति मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नन्दानगर निवास पर विरोध जताने पहुंचे थे, जिसकी घोषणा पूर्व में हुई थी और उसी कारण पुलिस ने पाण्डे दम्पति को हिरासत में ले लिया। इस मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा, जिसमें लिखा कि मानवीय आधार पर पाण्डे दम्पति की नियमानुसार जो रिहाई हो सके उन्हें रिहा किया जाए, क्योंकि मेरे द्वारा कोई शिकायत पाण्डे दम्पति के खिलाफ नहीं की गई है और ना ही मैंने आन्दोलनकारी छात्रों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने पूरी रिकार्डिंग भी चेक करवाकर आरोप को निराधार बताया था। इंदौर के ही पाण्डे दम्पति भी इस दुष्प्रचार का शिकार होकर मेरे इंदौर निवास पर धरना देने पहुंचे थे। पाण्डे दम्पति के दो छोटे बच्चे हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि मेरा मानना है कि माता-पिता से हुई भूल का दुष्प्रभाव उनके मासूम बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए। मेरे द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई है और मुझे कोई आपत्ति भी नहीं है। विजयवर्गीय ने पुलिस आयुक्त से पत्र में कहा कि यदि विधि एवं नियमों के अंतर्गत संभव हो, तो मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संबंधित पांडे दंपति के प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही कर उन्हें रिहा किए जाने का कष्ट करें। मेरा मानना है कि वे सोशल मीडिया पर किए गए दुष्प्रचार का शिकार हुए थे तथा अब उन्हें अपनी भूल का एहसास हो चुका होगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में उनके द्वारा भ्रामक जानकारी के आधार पर ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं की जाएगी।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 26 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




