कहा कि सचमुच देश और दुनिया का कोई और शहर ऐसा काम कर ही नहीं सकता है जैसा काम इंदौर नगर निगम में भाजपा की परिषद के कार्यकाल में हो रहा है। नगर निगम के नामांतरण घोटाले में 356 संपत्ति के मालिक के नाम नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बदल दिए। जिन नए लोगों के नाम मालिक के रूप में दर्ज किए गए उनमें से 51 लोगों ने इस संपत्ति को बेच भी दिया। इस घोटाले के उजागर होने के बाद नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के द्वारा जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस जांच कमेटी के द्वारा अपनी रिपोर्ट दे दी गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस रिपोर्ट के आधार पर निगम आयुक्त के द्वारा कुछ कर्मचारियों को निलंबित करने और कुछ की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस इतने बड़े घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है। इस जांच रिपोर्ट में कुछ छोटे कर्मचारियों को दोषी ठहरा दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि इस घोटाले की जांच में भी घोटाला हो गया है। के बजाय इंदौर नगर निगम आयुक्त इस घोटाले ने इंदौर नगर निगम की यह पूरा घोटाला धोखाधड़ी और को चाहिए कि वह इस मामले की छवि को धूमिल किया है।
निगम ने रचाया शासकीय जमीनों पर कब्जे का खेल
भ्रष्टाचार का मामला है। इस मामले की शिकायत साइबर क्राइम में करने
चिंटू चौकसे एवं सोनिला मिमरोट ने कहा कि इंदौर नगर निगम के द्वारा अब शासकीय जमीन पर कब्जे का खेल शुरू करवाया जा रहा है। इसके अंतर्गत निगम की महापौर परिषद में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों के संपत्तिकर के खाता खोलने का प्रस्ताव लाया गया है। यह प्रस्ताव निश्चित तौर पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने की घटनाओं को बढ़ावा देने का काम करेगा। भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सरकारी जमीनों की लूट करने के लिए इस प्रस्ताव को लाया गया है। कांग्रेस इस प्रस्ताव का पूरी तरह से विरोध करती है। हमारा कहना है कि अवैध कॉलोनी में रहने वाले नागरिकों के मकान का संपत्ति कर का खाता खोला जाना चाहिए। लेकिन सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों का संपत्ति कर का खाता नहीं खोला जाना चाहिए। जाएगा की इस घोटाले के तार कहां तक जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 19 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




