सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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पूर्व पार्षद ने मांगी आरटीआई में जानकारी, 30 दिन में होगी उपलब्ध

पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने 24 अगस्त को आरटीआई लगाकर मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग में वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव तथा जुलाई 2026 में अद्यतन मतदाता सूची से…

पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने 24 अगस्त को आरटीआई लगाकर मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग में वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव तथा जुलाई 2026 में अद्यतन मतदाता सूची से संबंधित महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी मांगी गई थी। इस पर आयोग ने कलेक्टर को 30 दिन में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। कौशल ने कहा कि यह राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के सवालों के बीच इंदौर मतदाता सूची पर राज्य निर्वाचन आयोग का बड़ा कदम है। कौशल ने 2022 के नगरीय निकाय चुनाव का निकायवार एवं जिलावार महिला, पुरुष तथा अन्य मतदाताओं का डेटा एवं वर्ष 2022 का बूथवार मतदाता डेटा के साथ ही प्रत्येक बूथ पर कुल मतदाता, मतदान किए गए वोट तथा प्रत्याशीवार प्राप्त मतों की जानकारी, वर्ष 2022 के परिसीमन एवं चुनाव में इस्तेमाल जनसंख्या/जनगणना के आधार का वार्डवार विवरण, जुलाई 2026 में अद्यतन की गई मतदाता सूची का बूथवार डिजिटल डेटा मांगा है। पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को बार-बार एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजकर मामले को लंबा खींचना उचित नहीं है। यदि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो बूथवार मतदाता संख्या और चुनाव परिणाम से संबंधित उपलब्ध आधिकारिक डेटा देने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘लोकतंत्र में मतदाता सूची लोकतंत्र की आत्मा है। हर वोट कीमती है और हर निकाय महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची और चुनावी आंकड़ों में पारदर्शिता जनता का संवैधानिक अधिकार है। यदि इस अधिकार का हनन किया गया तो कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी और कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के अनुसार लोकतांत्रिक आंदोलन भी चलाया जाएगा।’ कौशल ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे मतदाता सूची की पारदर्शिता के सवालों के बीच इंदौर में मांगे गए आंकड़ों को सार्वजनिक करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कौशल ने कहा कि निर्धारित अवधि में यदि संपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई या केवल औपचारिक जवाब देकर मामले को टालने का प्रयास किया गया, तो वे मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में अपील करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी लेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 28 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें