प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अमित चौरसिया ने कहा कि सरकार ने सफाई कर्मचारियों को शोषण, महंगाई और आर्थिक बदहाली के हवाले कर दिया है। आखिर सफाई कर्मचारियों का कितना खून सरकार चूसेगी। कर्मचारी दिन- रात गंदगी में उतरकर आपके शहरों को स्वच्छ रखते हैं, उनके घरों में चूल्हा जलाने लायक वेतन और सम्मानजनक जीवन की गारंटी तक आपकी सरकार नहीं दे पा रही है। भाजपा सरकार स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग और पुरस्कारों का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जिन हाथों की मेहनत से ये पुरस्कार मिलते हैं, उन्हीं हाथों को समय पर वेतन नहीं मिलता। ठेकेदारों की मनमानी, पीएफ- ईएसआई में अनियमितताओं, महीनों से लंबित वेतन और आउटसोर्सिंग के शोषण पर सरकार मौन क्यों है? भाजपा न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन यह नहीं बता रही कि 2019 से 2026 के बीच आवश्यक वस्तुओं, रसोई गैस, डीजल-पेट्रोल और दैनिक उपभोग की चीजों में महंगाई दर किस अनुपात में बढ़ी है। भाजपा का विकास मॉडल भी गजब है- सफाई कर्मचारी कचरा साफ करें, ठेकेदार मलाई खाएं और सरकार अपनी पीठ थपथपाए! कई नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में सफाई कर्मचारियों को 3 से 6 महीने तक का वेतन बकाया रहता है। कागजी मजदूरी बढ़ाने से पहले समय पर भुगतान की गारंटी दी जानी चाहिए। पूर्व की घोषणाओं का लाभ सफाई कर्मियों को आज तक नहीं मिला है और तो और सफाई कर्मचारियों को ठेकेदारी और अस्थायी रोजगार से मुक्ति नहीं मिली।
यह खबर सिटी ब्लास्ट अख़बार के 8 November 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




