शहर कांग्रेस की साढ़े 5 विधानसभा के 24 ब्लॉक अध्यक्ष चिन्टू चौकसे के नेतृत्व में बनाए गए थे। 19 सितम्बर को छात्रों की गूंज कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष ज्यादातर अन्दर नहीं जा पाए थे और प्रदेश कांग्रेस सहप्रभारी से लेकर कुछ वरिष्ठ नेता और कांग्रेसी अन्दर चले गए थे। इस मुद्दे पर कल जंजीरवाला क्षेत्र में ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक बुलाई गई थी और मुद्दा यही था कि जब हमसे काम लेना था तो आश्वस्त किया गया था कि यह कार्यक्रम पूरी तरह छात्रों का है, इसमें कांग्रेसी नहीं जाएंगे, कुछ ब्लॉक अध्यक्षों ने यह भी कहा था कि प्रदेश कांग्रेस सहप्रभारी ने बैठक के दौरान कहा था कि मैं स्वयं भी छात्रों की गूंज कार्यक्रम में अन्दर नहीं जाएंगे, अगर जाएंगे तो सभी ब्लॉक अध्यक्षों को राहुल गांधी से मिलवाया जाएगा, लेकिन ब्लॉक अध्यक्षों को राहुल गांधी से मिलवाने की कोई योजना प्रदेश कांग्रेस, शहर कांग्रेस और प्रदेश प्रभारी से लेकर सहप्रभारी ने भी नहीं की, कुछ ब्लॉक अध्यक्षों का सीधा निशाना प्रदेश कांग्रेस सहप्रभारी उषा नायडू पर भी था और गुस्सा इतना था कि कुछ ने तो खुलेआम उषा नायडू के विरोध में बोले भी। कल उषा नायडू ने ब्लॉक अध्यक्षों की शाम को जूम मीटिंग दोपहर में बुलाई थी और ब्लॉक अध्यक्ष में से ही किसी ने उषा नायडू को फोन कर जूम मीटिंग में ब्लॉक अध्यक्षों को शामिल होने की बात नहीं कही और कहा कि मीटिंग में मुख्य मुद्दा ही सहप्रभारी उषा नायडू के असहयोग राहुल गांधी के मिलवाने का है। मीटिंग में यह भी कहा गया कि उषा नायडू ने ब्लॉक अध्यक्षों से कहा था कि मैं खुद भी बाहर रहूंगी, लेकिन उषा नायडू छात्रों की गूंज कार्यक्रम में पास लगाकर अन्दर रही और नृत्य की मुद्रा में भी दिखाई दी, जबकि उषा नायडू ने ही कहा था कि ब्लॉक अध्यक्षों को राहुल गांधी से मुलाकात कराई जाएगी और उसी आधार पर ब्लॉक अध्यक्ष ने मंडलम स्तर और बूथ स्तर पर कार्य करवाया था और युवा व छात्र के रजिस्ट्रेशन भी करवाए थे। ब्लॉक अध्यक्षों की नाराजगी यह भी थी कि 125 लोगों की सूची राहुल गांधी से रेडिसन में मिलवाने के लिए बनाई गई थी उसमें भी उषा नायडू की भूमिका महत्वपूर्ण थी। वहां भी किसी ब्लॉक अध्यक्ष को मौका राहुल गांधी से मिलने का नहीं मिला।
राहुल गांधी के दिल्ली जाने के दौरान भी ब्लॉक अध्यक्षों को विमानतल के बाहर और अन्दर मिलवाने की कोशिश नहीं की और ना ही डोम के अन्दर जाने के पास कही ब्लॉक अध्यक्षों को नहीं मिला और कुछ को ही मिलवाया और कई कांग्रेस के नेता अपने परिवार के साथ पास लगाकर अन्दर डोम में बैठे थे। ब्लॉक अध्यक्षों ने कहा कि कार्यकर्ताओं की कीमत नहीं की जा रही है और उषा नायडू की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए और कहा कि वे गांधी भवन में बोलती कुछ है और आयोजन में करती कुछ है। इसी कारण कल उषा नायडू की जूम मीटिंग का बहिष्कार भी किया गया। कल बैठक के दौरान ही उषा नायडू का वीडियो कॉल आया उस पर बात भी की गई और ब्लॉक अध्यक्षों के चेहरे भी बैठक के दिखाए गए। सभी ने कहा कि हम जूम मीटिंग में शामिल नहीं होंगे। कितने लोग मौजूद है यह भी उषा नायडू ने वीडियो कॉल के दौरान पूछा तो मौजूद सभी के चित्र दिखाए गए।
उषा नायडू ने पूछा कि क्या जूम मीटिंग निरस्त करना है तो सभी ने कहा हां निरस्त करना है। उषा नायडू के समक्ष ब्लॉक अध्यक्ष राहुल गांधी से नहीं मिलने की नाराजगी भी प्रकट की। नकली पास की बात भी हुई कहा कि इतने पास जारी नहीं हुए थे। उषा नायडू ने यहां तक कहा कि मैं दो-तीन दिन में आती हूं फिर आप सब लोगों से चर्चा करूंगी। बाद में कुछ ब्लॉक अध्यक्ष बोले कि इस तरह के ही मुद्दों पर गुजरात में कांग्रेसियों के बीच विवाद की स्थिति नायडू मैडम के कारण ही बनी थी। बैठक के दौरान सभी के मोबाइल बंद करवा दिए गए थे या साइलेंट पर करवा दिए गए थे, किसी को भी फोटो नहीं खेंचने दिए गए। कुल मिलाकर ब्लॉक अध्यक्षों की एकजुटता कल नजर आई, 6 ब्लॉक अध्यक्ष नहीं पहुंचे थे उनमें से कुछ ने मीटिंग होने की सूचना ऊपर भी दे दी थी उसी के बाद उषा नायडू ने बैठक के समय पर ही फोन लगाए, यह बैठक करीब 2 बजे शुरू होकर 3.15 बजे तक सवा घंटे चली।
चिन्टू चौकसे के प्रति नाराजगी नहीं थी क्योंकि चिन्टू चौकसे खुद अन्दर नहीं गए थे वे बाहर ही थे, उन्होंने खुद स्वयं अपना पास नहीं बनवाया था। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस बैठक की जानकारी भोपाल और दिल्ली तक भी दी गई है और इसे कुछ वरिष्ठ नेता अनुशासनहीनता की श्रेणी भी मान रहे हैं। इधर चिन्टू चौकसे से इस मामले में चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि वे मुंबई में हैं और ब्लॉक अध्यक्ष की बैठक की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 22 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




