सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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संपादकीय पूर्व न्यायाधीशों एवं आईएएस अधिकारियो की चुनाव आयोग को क्लीन चिट

नाव आयोग के विरोध में काकरोच जनता पार्टी एवं विपक्षी पार्टियों के चल रहे इस आंदोलन के चलते चुनाव आयोग को देश के चालीस से अधिक पूर्व न्यायाधीश एवं सौ…

नाव आयोग के विरोध में काकरोच जनता पार्टी एवं विपक्षी पार्टियों के चल रहे इस आंदोलन के चलते चुनाव आयोग को देश के चालीस से अधिक पूर्व न्यायाधीश एवं सौ से अधिक पूर्व आई ए एस आई एफ एस राजनयिक एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने चुनाव आयोग के समर्थन में आम जनता के नाम खुला पत्र लिखा है। इस खुले पत्र में पूर्व अधिकारीयो ने एस आई आर प्रक्रिया का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि एस आई आर का उद्देश्य मतदाता सूची में से अपात्र मतदाता के नाम हटाना है। कोई व्यवस्था चुनाव जीतने पर सही और चुनाव हारने पर धांधली वाली नही हों सकती पत्र में उन्होंने ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी सर्वैधानिक संस्थाओं का आकलन राजनैतिक जुड़ाव के आधार पर नही किया जाना चाहिए। यह सही है कि सवैधानिक संस्थाओं को सदैव निष्पक्ष एवं तटस्थता से कार्य करना चाहिए पर चुनाव आयोग के कार्यों पर केवल किसी पार्टी की हार या जीत के आधार पर संदेह व्यक्त कर उन्हें किसी एक राजनैतिक पार्टी के साथ जुड़े होने के आरोप को किसी राजनीतिक पार्टियों के आरोपो के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। इन आरोपों के सही या गलत होने के निर्णय करने के लिये अदालतें मौजूद है और समय समय पर न्यायालय ने इन मामलों में तत्काल सुनवाई कर अपने उचित आदेश. भी जारी किए हैं। केवल किसी पार्टी की हार के आधार पर चुनाव आयोग पर अनर्गल आरोपो को सही ठहराना उचित नहीं है। तब जब चुनाव परिणाम एक तरफा सत्तापक्ष के फेवर में न होकर मिश्रित चुनाव परिणाम देखें जा रहे हो, इसी चुनाव आयोग द्वारा कराये गए चुनावो में सत्तारूढ़ दल को हिमाचलप्रदेश जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। सत्तारूढ़ दल बहुमत के आंकड़े को छू भी नही पाया उसे सरकार बनाने के लिए अपनी सहयोगी पार्टीयो का सहयोग लेना पड़ा था उस समय विपक्षी पार्टियों ने चुनाव को लेकर कोई शिकायत नही की और यदि विपक्षी पार्टियों को कोई शिकायत या आपत्ति है तो चुनाव आयोग के इन निर्णयों पर भी आपत्ति जताना चाहिए थी जिनमें विपक्षी पार्टियों की विजय हुई हैं। पूर्व प्रशानिक अधिकारियों न्यायाधीशों राजनयिकों के पत्र में इन्हीं सब बातों का जिक्र है। आम जनता के नाम लिखे इस खुले पत्र का आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है क्या आम जनता विपक्षी पार्टियों के आंदोलन से अपने आप को जोड़े रखती हैं क्या यह पत्र चुनाव आयोग की विपक्ष के आंदोलन से गिरती विश्वनीयता बनाये रखने में कामयाब होगा या विपक्ष अपने आंदोलन के द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा लेने में सफल हो सकेगा यह सब आने वाले समय में ही पता चलेगा। – मुकेश नागर

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 11 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 11 अक्टूबर 2026, पृष्ठ 9