मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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भाजपा परिषद ने 4 साल में इंदौर को बर्बाद कर दिया- कांग्रेस

घोटालों में दोषियों को नहीं मिली सजा, शहरहित में शासन के समक्ष आवाज नहीं उठा सके, नागरिकों की मौत के जिम्मेदारों को भी बचाने का काम किया

आज शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और निगम में नेताप्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने मीडिया से चर्चा में कहा कि नगर निगम की भाजपा की परिषद ने इन 4 सालों में इंदौर को बर्बाद करने का काम किया। इस कार्यकाल में कई घोटाले हुए, किसी भी घोटाले के दोषी को सजा दिलवा सके ना ही उस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठा सके। चौकसे और मिमरोट ने कहा कि इस परिषद के कार्यकाल की शुरूआत में बेलेश्वर धाम में हादसा हुआ, इस हादसे में 36 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इस घटना में केवल इंजीनियरों को निलंबित किया गया था और बाद में उन्हें बहाल करते हुए अच्छी पोस्टिंग दी गई। निगम ने मृतकों के परिजनों को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी और ना ही निगम में कोई नौकरी दी। इसी परिषद के कार्यकाल में दूषित पानी की घटना भागीरथपुरा में हुई, जिसमें 36 लोगों की मौत हुई और इस घटना में निगम ने अधिकारी और कर्मचारियों को जिम्मेदार ही नहीं माना। दोनों कांग्रेस नेताओं ने इसके लिए महापौर और उनकी निगम परिषद को दोषी माना। महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वे अपने कार्यकाल के दौरान इंदौर हित के लिए प्रदेश सरकार के समक्ष आवाज भी नहीं उठा सके, जबकि नगर निगम को चुंगी क्षतिपूा|त और स्टाम्प ड्याूटी व प्रवेश कर के 600 करोड़ से ज्यादा लेना बाकी है फिर भी महापौर मुख्यमंत्री के समक्ष पैसों को लेकर कोई बात नहीं करते हैं, जबकि नगर निगम आर्थिक कंगाली के दौर से गुजर रहा है। इंदौर के व्यवस्थित विकास के लिए इंदौर का मास्टर प्लान अटका हुआ है और महापौर भोपाल जाकर भी खामोश रहते हैं। निगम और गृह निर्माण मंडल की भागीदारी से हुकुमचंद मिल की जमीन पर होने वाले विकास की फाइल भी महीनों से बंद पड़ी है और भोपाल जाकर महापौर इस मुद्दे पर भी कुछ नहीं बोलते हैं। इंदौर मेट्रो पोलिटन सिटी के प्रस्ताव में पहले उज्जैन शब्द जोड़ा गया और महापौर खामोश रहे। इसी कार्यकाल में 20 साल से विद्यार्थियों, बुजुर्गों, दिव्यांगों को सिटी बस के मासिक पास में रियायत मिल रही थी उसे भी बंद किया गया। झांकी निर्माण में आर्थिक सहयोग निगम देता था उसे भी इस साल बंद किया गया। जनता के हित और शहर की परम्परा के काम को भी बंद करने का काम महापौर और परिषद ने किया है। निगम भ्रष्टाचार के गढ़ के रूप में स्थापित हो गया है। बगैर रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता है। बड़े अधिकारियों ने निगम में बैठना बंद कर दिया है। बड़े अधिकारी सिटी बस कम्पनी के कार्यालय या स्मार्ट सिटी कार्यालय में जाकर बैठते हैं और निगम में आम नागरिक के अलावा पार्षद भी परेशान होते हैं, क्योंकि इनकी बात कोई सुनने वाला नहीं है। चौकसे और सोनिला मिमरोट ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के इस परिषद के कार्यकाल को घोटाले वाले कार्यकाल के रूप में पहचाना जाएगा। ड्रेनेज घोटाला जो 1 हजार करोड़ का था उसे जांच के बाद कथित तौर पर 100 करोड़ का घोटाला में समेटने की कोशिश की। इस घोटाले के मुख्य जादूगर सामने आज तक भी नहीं आए हैं, जबकि दावा किया गया था कि जिम्मेदार अधिकारियों से घोटाले की राशि वसूली जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस ने भी जांच ठंडे बस्ते में डाली। नामांतरण घोटाला भी सामने आया है। अभी भी किसी को उसमें सजा नहीं हुई है। इस घोटाले में 560 व्यक्तियों के खून-पसीने की कमाई की सम्पत्ति का मालिक दूसरे व्यक्ति को बना दिया गया है। नए मालिकों ने 51 सम्पत्ति को बेच भी दिया है। चौकसे और मिमरोट ने कहा कि उज्जैन में विकास कार्य को लेकर रोड चौड़ीकरण में गाइड लाइन के अनुसार मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन इंदौर के लिए रोड चौड़ीकरण में कोई मुआवजा का प्रावधान नहीं किया गया है। छावनी, जिंसी और जूना रिसाला के रहवासी जो 50 से 100 साल पुराने मकान में रह रहे थे, नुकसानी से परेशान है। यहां भी मुआवजा मिलना चाहिए। सड़कों का पेंचवक तक नहीं हो रहा है, कई सड़कों की हालत खराब है। जहां फ्लाय ओवर ब्रिज बन रहे हैं वहां की सर्विस रोड की हालत खराब है। महापौर ने सराफा चौपाटी को नया रूप देने का वादा किया था, जांच कमेटी भी बनाई और जांच का सिलसिला चला, लेकिन नतीजा ठीक नहीं आया। इस साल गर्मी में जनता ने पेयजल संकट जबर्दस्त भुगता लोगों ने निजी टैंकर से बड़ी राशि देकर पानी खरीदा, शहर में गंदे पानी की समस्या बनी हुई है, कर बढ़ाए गए हैं, निगम अधिकारी चालान बनाने, सम्पत्ति कुर्क करने, सील लगाने की धौेंस देकर जनता को परेशान कर रहे हैं, इन्हीं जनता ने वोट देकर भाजपा की परिषद बनाई क्या यही उनका गुनाह है। निगम को आए दिन वेतन बांटने के लिए बैंक से ओवर ड्राफ्ट लेना पड़ता है। ग्रीन बांड जारी कर सोलर प्लांट स्थापित किया गया, जबकि बड़ा दावा किया था और बिजली के बिल में मात्र 45 लाख रु. प्रतिमाह की कमी आई। ठेकेदारों के 800 करोड़ रुपया निगम पर बकाया है। निगम बकाया राशि ठीक से नहीं दे रहा है, इसलिए ठेकेदारों ने भी काम करना बंद कर रखा है या ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। निगम ने विकास के नाम पर हजारों पेड़ काटे और अब पौधे लगाने का शोर मचाया जा रहा है। 4 साल में जो पौधे लगे उनमें कितने जीवित है, इनका हिसाब नहीं है, उन पर खर्च कितना किया गया वह श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए। निगम ने डिजिटलाइजेशन के नाम पर जनता के साथ मजाक किया, जबकि निगम का पूरा काम शासन के पोर्टल से चलता है। शहर की सड़कों पर जगह-जगह कचरा फैला हुआ है, खाली प्लाट पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। निगम ने मास्टर प्लान की 23 सड़कों का निर्माण काम हाथ में लिया, लेकिन कालोनी, गली, मोहल्लों की सड़कों की हालत खराब है। इंदौर में यातायात की स्थिति काफी खराब है, शाम को जाम लगता है जरा-सा पानी गिरने पर सड़कों पर पानी भराता है, इससे और जाम की स्थिति बनती है। सरकारी स्कूलों के भवन की मरम्मत भी निगम नहीं कर पा रहा है। अधिकारियों की मिली भगत के कारण सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग में निजी संस्थाओं के द्वारा प्रशिक्षण क्लास का संचालन कर व्यापार किया जा रहा है। बीआरटीएस कारिडोर, महापौर इंटर्नशिप योजना, स्वास्थ्य एवं महिला सशक्तिकरण, युवा प्रशिक्षण, अवैध वृद्ध आश्रम, सामुदायिक भवन, योग भवन, श्रमिक कल्याण योजना, रीजनल पार्क, बिजासन माता टेकरी, मेघदूत उपवन, नेहरू पार्क, स्विमिंग पूल, अटल खेल संकुल, बगीचा, ओपन जिम, संजीवनी क्लिनिक के मुद्दे भी कांग्रेस ने उठाए। आज मीडिया से चर्चा में कई तरह के आरोप शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और निगम में नेताप्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने उठाए, जो प्रकाशित किया गया।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 6 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें