रविवार, 8 नवम्बर 2026
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इसी मॉडल पर फिर टिकी नंबर वन की उम्मीद घर-घर से कचरा उठाना ही नहीं, छह श्रेणियों में बांटना इंदौर की सबसे बड़ी ताकत

100% डोर-टू-डोर कलेक्शन, स्रोत पर सेग्रीगेशन और कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग ने बनाया देश में अलग मॉडल, देपालपुर को स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी निभाकर भी पेश की मिसाल

इंदौर। स्वच्छता के मामले में लगातार आठ बार देश में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका इंदौर एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम रखने की तैयारी में है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के परिणाम 11 नवंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में घोषित होंगे। इसके लिए इंदौर को आमंत्रण मिला है। इस बार भी शहर की सबसे बड़ी ताकत उसका डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और घरों से निकलने वाले कचरे का छह श्रेणियों में पृथक्करण है। इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था की खासियत यह है कि यहां सफाई केवल सड़कों तक सीमित नहीं, बल्कि कचरे के घर से निकलने से लेकर उसके वैज्ञानिक निस्तारण तक पूरी व्यवस्था विकसित की गई है।

क्यों खास है इंदौर का मॉडल

हर घर तक कचरा गाड़ी: शहर के 85 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था है। घरों और दुकानों से नियमित कचरा उठाने के लिए निर्धारित रूट पर वाहन चलते हैं। इससे सड़कों पर कचरा फेंकने और खुले में जमा होने की समस्या कम हुई है।

छह तरह का सेग्रीगेशन:

गीला, सूखा, प्लास्टिक, सैनिटरी, घरेलू हानिकारक और ई-वेस्ट अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की व्यवस्था है। नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट भी छह श्रेणियों में स्रोत पर कचरा पृथक्करण और व्यापक डोर-टू-डोर कलेक्शन को इंदौर मॉडल की आधारशिला बताती है।

कचरे से तैयार हो रहे

संसाधन: गीले कचरे से खाद और बायो-सीएनजी बनाई जाती है, जबकि सूखे कचरे को मटेरियल रिकवरी सेंटर में छांटकर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। यानी कचरे को सिर्फ उठाया नहीं जाता, उसका उपयोग भी किया जाता है।

इंदौर में रोजाना लगभग 700 टन गीला और 1200 टन सूखा कचरा निकलता है। रिपोर्ट में डोर- टू-डोर कलेक्शन 100 प्रतिशत और स्रोत पर सेग्रीगेशन 98 प्रतिशत बताया गया था।

देपालपुर को भी बनाया

स्वच्छ: स्वच्छ शहर जोड़ी अभियान के तहत इंदौर को देपालपुर का मेंटर बनाया गया। केंद्रीय मंत्रालय के अनुसार वहां चार श्रेणियों में कचरा संग्रहण और पृथक्करण की व्यवस्था लागू हुई तथा पांच साल से जमा 1250 टन पुराने कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया।

अब परीक्षा सिर्फ इंदौर की नहीं, मॉडल की भी- इस बार

इंदौर की उपलब्धि का आकलन केवल अपनी सफाई व्यवस्था के आधार पर नहीं होगा, बल्कि देपालपुर में किए गए काम भी स्वच्छ शहर जोड़ी अभियान के तहत महत्वपूर्ण हैं। इंदौर ने यह दिखाने की कोशिश की है कि स्वच्छता का मॉडल दूसरे शहरों में भी लागू किया जा सकता है। 11 नवंबर को आने वाले परिणाम बताएंगे कि घर-घर कचरा कलेक्शन, सेग्रीगेशन और वैज्ञानिक निस्तारण की यह व्यवस्था सर्वेक्षण में कितनी प्रभावी साबित हुई।

यह खबर सिटी ब्लास्ट अख़बार के 8 November 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 8 November 2026, पृष्ठ 4