डंबना यह है कि पिछले कुछ वर्षों से एक्सप्रेस-वे को विकास के पर्याय के रूप में तो पेश किया जा रहा है, लेकिन उन पर सफर लगातार असुरक्षित होता गया है। विकास के लिए अच्छी और निर्बाध सड़कें जरूरी हैं, लेकिन इससे ज्यादा अहम यह है कि उस पर सफर सुरक्षित हो। विडंबना यह है कि पिछले कुछ वर्षों से एक्सप्रेस-वे को विकास के पर्याय के रूप में तो पेश किया जा रहा है, लेकिन उन पर सफर लगातार असुरक्षित होता गया है। देश में अलग-अलग एक्सप्रेस- वे पर आए दिन होने वाले हादसे यह बताने के लिए काफी हैं कि एक ओर प्रबंधन के स्तर पर घोर लापरवाही बरती जा रही है, तो दूसरी ओर बेलगाम तरीके से वाहन चलाने वाले भी सतर्कता बरतना जरूरी नहीं समझते। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली से महोबा जा रही एक बस में बुधवार रात आग लगने की वजह से नौ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि बीस लोगों को किसी तरह बचाया जा सका। हैरानी की बात है कि जब बस में आग लगने की आशंका को लेकर यात्रियों ने चालक- परिचालक को सचेत किया और शोर मचाया, तो उन्होंने लापरवाही से उसे खारिज कर दिया। इसके बाद बस में आग लग गई और चालक-परिचालक भाग निकले। इस हादसे के संदर्भ में देखें, तो बहुस्तरीय लापरवाही का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हादसे का शिकार हुई बस मध्य प्रदेश से संचालित थी, जिसका पंजीकरण बिहार में हुआ था, जबकि फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान और प्रदूषण प्रमाण पत्र हरियाणा से जारी किया गया था। आखिर ऐसा कैसे संभव हुआ कि अब तक यह बस इस तरह के दस्तावेजों के साथ सड़क पर दौड़ रही थी, मगर उसे रोकने-टोकने वाला कोई नहीं था? साफ है, एक ओर यह दुर्घटना सड़क यातायात प्रबंधन में प्रशासन के स्तर पर बरती जाने वाली आम लापरवाही का नतीजा है, वहीं सिर्फ बेहिसाब मुनाफे के लिए बसों के संचालक भी यात्रियों की जान की परवाह नहीं करते हैं। खबरों के मुताबिक, नोएडा पुलिस दिल्ली पुलिस को पत्र लिख कर यह जानकारी मांगेगी कि कश्मीरी गेट से इतनी बड़ी संख्या में बसों का कथित तौर पर अवैध रूप से संचालन किस तरह हो रहा है। विचित्र यह है कि कोई बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासन जिस पैमाने पर सक्रिय दिखता है, उतनी सक्रियता सामान्य दिनों में नहीं दिखती। जबकि ऐसा होता, तो शायद व्यवस्थागत लापरवाही की वजह से होने हादसों में कमी लाई जा पाती।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 25 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



