खजराना थाना पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए शातिर साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी खुद को एसबीआई, एचडीएफसी और अन्य प्रमुख बैंकों का मैनेजर बताकर लोगों को झांसे में लेता था। आरोपी बैंक खातों की केवाईसी बंद होने का डर दिखाकर और फर्जी ऐप के जरिए लोगों के गाढ़े पसीने की कमाई पर डाका डालता था। संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को इंदौर से धर दबोचा है।
पुलिस के अनुसार, संयुक्त कार्रवाई के दौरान पकड़ा गया आरोपी पंकज गुप्ता पिता अवधेश गुप्ता मूल रूप से नागदा उज्जैन का निवासी है और वर्तमान में इंदौर के स्कीम नंबर 134 में रह रहा था। आरोपी के खिलाफ मुंबई में साइबर ठगी की शिकायत दर्ज थी, जिसके तार इंदौर से जुड़े पाए गए थे। मुंबई क्राइम ब्रांच की सूचना पर खजराना पुलिस ने स्थानीय स्तर पर मदद मुहैया कराई और आरोपी के ठिकाने पर दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी पंकज ने साइबर फ्रॉड के चौंकाने वाले तौर-तरीकों का खुलासा किया। आरोपी ने बताया कि वह और उसका गिरोह बैंक ग्राहकों को फोन करके खुद को बैंक मैनेजर बताते थे और उनकी बैंक केवाईसी सस्पेंड या बंद होने का झांसा देते थे। जब लोग उनके झांसे में आ जाते थे, तो आरोपी उन्हें एक क्यूआर कोड भेजकर वेरिफिकेशन के नाम पर महज 5 रुपये डालकर बैलेंस चेक करने को कहते थे। जैसे ही पीड़ित दिए गए लिंक या क्यूआर कोड से बैलेंस चेक करता था, आरोपी उनके खाते का पूरा पैसा उड़ा देते थे। इसके अलावा, आरोपी तकनीकी रूप से दक्ष होने के कारण फर्जी और स्पूफिंग ऐप्स भी खुद डेवलप करता था। वह इन शातिर ऐप्स को अन्य साइबर अपराधियों को बेचता था, जिसका इस्तेमाल कर आम लोगों को गुमराह किया जाता था और साइबर क्राइम की बड़ी वारदातों को अंजाम दिया जाता था। खजराना पुलिस और मुंबई क्राइम ब्रांच आरोपी के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन और बैंक खातों की पड़ताल कर रही है। आरोपी को अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच के सुपुर्द किया जा रहा है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 3 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 12 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



