सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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संपादकीय माचिस से हत्या तक: छोटी बातों पर बढ़ती हिंसा क्या संकेत दे रही है?

ल्ली में माचिस न देने से उपजे विवाद के बाद चाकू से हुए हमले में शामिल तीन अभियुक्तों में एक नाबालिग भी है। जिस दौर में अर्थव्यवस्था के चमकते आंकड़ों…

ल्ली में माचिस न देने से उपजे विवाद के बाद चाकू से हुए हमले में शामिल तीन अभियुक्तों में एक नाबालिग भी है। जिस दौर में अर्थव्यवस्था के चमकते आंकड़ों को विकास का पर्याय बना कर पेश किया जा रहा है, उसमें बहुत मामूली बातों पर भी न केवल मारपीट, बल्कि हत्या तक कर देने की घटनाएं आखिर क्या बताती हैं। दिल्ली के कन्हैया नगर इलाके में मंगलवार को एक युवक की इसलिए हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने सिगरेट जलाने के लिए माचिस देने से इनकार कर दिया था। यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि इतनी छोटी-सी बात पर कोई किसी की जान ले लेगा। मगर हकीकत यही है कि कहीं महज बीड़ी न देने तो कहीं बहुत कम रकम पर उठे विवाद के बाद हत्या तक कर देने की घटनाएं अब धीरे-धीरे आम होती जा रही हैं। दिल्ली में माचिस न देने से उपजे विवाद के बाद चाकू से हुए हमले में शामिल तीन अभियुक्तों में एक नाबालिग भी है। इस घटना में तात्कालिक आवेश और बिना सोचे बेलगाम होकर किसी की जान ले लेने की बढ़ती प्रवृत्ति तो दिखती ही है, लेकिन इससे यह भी साफ है कि किसी हिंसक वारदात को अंजाम देने वालों को बीच कहीं भी कानून का खौफ नहीं दिखता। सवाल है कि यह किसकी नाकामी है। समाज और पुलिस की नजर में यह सिर्फ एक सामान्य आपराधिक मामला हो सकता है, लेकिन सच यह है कि अक्सर सामने आ रही ऐसी घटनाएं कई स्तर पर चिंताजनक बदलाव का भी संकेत देती हैं। ऐसा लगता है कि हमारा समाज आज एक विचित्र उतावलेपन का शिकार होता जा रहा है, जहां विवेक का उपयोग करते हुए किसी की बात सुनने का धैर्य नहीं बचा दिखता। नाबालिगों के भी बहुत छोटी बातों पर उग्र और हिंसक हो जाने का स्रोत आखिर क्या हो सकता है? यह छिपा नहीं है कि पिछले कुछ वर्षों से हत्या तथा अन्य जघन्य अपराधों में नाबालिगों की संलिप्तता समूचे समाज और देश के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर रही है। ऐसे किशोरों के मन में न तो अपने भविष्य की फिक्र दिखती है और न ही पुलिस के हाथों पकड़े जाने का डर दिखता है। अर्थव्यवस्था के मामले में किए जाने वाले दावों के समांतर ही अगर समय रहते सामाजिक विकास के मसले पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वक्त में गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 18 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें