सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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संपादकीय पश्चिम एशिया संकट: हमलों में 16 भारतीय नाविकों की मौत भारत कब तय करेगा जवाबदेही? प

श्चिम एशिया संघर्ष में 16 भारतीय नाविकों की मौत से चिंता बढ़ी। भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा और हमलों की जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। पश्चिम एशिया और फारस की…

श्चिम एशिया संघर्ष में 16 भारतीय नाविकों की मौत से चिंता बढ़ी। भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा और हमलों की जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने के साथ-साथ अब मानवीय संकट भी बढ़ता जा रहा है। समुद्री मार्गों में अपना प्रभाव मजबूत करने के लिए संघर्षरत पक्षों की ओर से भारत समेत अन्य देशों के नागरिकों को भी निशाना बनाया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फारस की खाड़ी और काला सागर में हमलों के दौरान अब तक सोलह भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। ऐसे में अहम सवाल यह है कि क्या किसी युद्ध में आम नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन नहीं है? क्या इन हमलों के लिए वैश्विक स्तर पर संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय नहीं की जानी चाहिए? दूसरी ओर, भारत के शासन की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। बिना किसी उकसावे के हो रहे इन हमलों में भारतीयों की मौत पर महज औपचारिक चिंता व्यक्त करने के बजाय भारत को ऐसी घटनाओं के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध दर्ज करना चाहिए। इसमें दोराय नहीं कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। फारस की खाड़ी के देशों में काम करने वाले भारतीय देश की अर्थव्यवस्था में भी अहम योगदान देते हैं। विदेश से भेजी जाने वाली उनकी कमाई देश के लिए विदेशी मुद्रा का एक बड़ा स्रोत है। इसलिए इस क्षेत्र में संघर्ष और अस्थिरता का सीधा असर भारत के नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक हितों पर पड़ना स्वाभाविक है। सरकार का दावा है कि होर्मुज जलमार्ग क्षेत्र से अब तक चार हजार से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग और फारस की खाड़ी के कुछ हिस्सों में जहाजों पर हमले लगातार बढ़े हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार, युद्ध में शामिल पक्षों के लिए सैनिकों और आम नागरिकों के बीच अंतर करना अनिवार्य है। किसी तीसरे देश के नागरिकों को निशाना बनाना भी नियमों के खिलाफ है। ऐसे में भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन हमलों की जांच और जवाबदेही की मांग उठानी चाहिए।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 10 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 10 अक्टूबर 2026, पृष्ठ 9