सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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2 हजार से ऊपर यूपीआई पर शुल्क से व्यापारियों में चिंता

नगद कारोबार बढ़ने का खतरा नगद कारोबार बढ़ा तो कर चोरी को मिल सकता है बढ़ावा -अक्षय जैन

2 हजार से ऊपर यूपीआई पर शुल्क से व्यापारियों में चिंता

2 हजार से अधिक के यूपीआई व्यापारी भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाए जाने की संभावित व्यवस्था से व्यापारियों में चिंता है।

इंदौर जिला प्रशासन की पहल पर इंदौर नगर निगम के द्वारा अन्नपूर्णा क्षेत्र में आज सुबह एक बड़ी कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के तहत सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाए गए 13 मकान तोड़ना शुरू किए गए हैं। इन मकान में रहने वाले नागरिकों के द्वारा इस कार्रवाई का जोरदार विरोध किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम घनश्याम धनगर के द्वारा भू राजस्व संहिता के तहत दर्ज किए गए प्रखंड में सुनवाई करने के उपरांत इन सभी लोगों की बेदखली का आदेश पारित किया गया था। अन्नपूर्णा मंदिर के पास के क्षेत्र में इन अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संयुक्त सचिव और इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि इसका असर इंदौर के 2 लाख से अधिक फुटकर-मझोले कारोबारियों पर पड़ेगा।

जैन ने कहा कि यूपीआई ने व्यापारियों के लिए नकदी, छुट्टे और कैश जमा कराने की परेशानी कम की है। ऐसे में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद उस पर शुल्क लगाना अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगा। उन्होंने कहा कि 0.4³ शुल्क छोटा दिखता है, लेकिन कम मार्जिन वाले कारोबार में इसका असर बड़ा है। 10 लाख रु. के मासिक यूपीआई कारोबार पर 4 हजार रु. यानी 48 हजार रु. सालाना और 50 लाख रु. के कारोबार पर 20 हजार रु. प्रतिमाह यानी 2.40 लाख रु. सालाना अतिरिक्त भार पड़ेगा। यह राशि सीधे व्यापारी के मुनाफे को प्रभावित करेगी। जैन ने कहा कि बिक्री और मुनाफा अलग-अलग हैं। माल की लागत, किराया, वेतन, जैन ने आशंका जताई कि शुल्क से बचने के लिए व्यापारी और ग्राहक फिर नगद भुगतान की ओर लौट सकते हैं। इससे डिजिटल लेन-देन और बाजार की पारदर्शिता प्रभावित होगी। नकद कारोबार बढ़ने का फायदा कर चोरी करने वालों को मिल सकता है और बिना बिल के लेन-देन बढ़ने की आशंका रहेगी। उन्होंने कहा कि कपड़ा, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान सहित कई क्षेत्रों में 2 हजार रु. से अधिक का भुगतान सामान्य है। सरकार को छोटे-मझोले कारोबार पर आर्थिक असर का आकलन कर प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करना चाहिए। डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन चाहिए, अतिरिक्त लागत नहीं।

बिजली व अन्य खर्च निकालने के व्यापारी कारोबार करता है। ऐसे में बाद बचने वाले सीमित मार्जिन पर ही नया शुल्क उसकी कमाई घटाएगा।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 16 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें