इंदौर। बाणगंगा थाना क्षेत्र में युवक को नामी फाइनेंस कंपनी और आनलाइन शापिंग प्लेटफार्म का कर्मचारी बताकर ठगी करने के दो अलग-अलग मामले सामने आए है। जालसाज ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए व्हाट्सएप पर कंपनी का फर्जी आईडी कार्ड भी भेजा और फिर प्रोसेसिंग फीस के बहाने क्यूआर कोड स्कैन करवाकर 25 हजार से अधिक रुपये ऐंठ लिए। दूसरे मामले में मिंत्रा कम्पनी का कर्मचारी बन युवक ने टेलीग्राम ग्रुप से जोडा और लालच देकर रुपये एंठ लिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस की शरण ली, जिसके बाद बाणगंगा थाना पुलिस ने दोनों ही मामलों में अज्ञात शातिर के खिलाफ दो प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, अहिल्या आश्रम निवासी हरिश्चंद्र पिता नरेश बरेठा ने बाणगंगा थाने में उपस्थित होकर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। फरियादी हरिश्चंद्र ने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बजाज फाइनेंस कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि उनका 1,00,000 रुपये का लोन स्वीकृत हो गया है। फरियादी को जब थोड़ा संदेह हुआ, तो आरोपी ने अपना भरोसा कायम करने के लिए व्हाट्सएप पर एक फर्जी पहचान पत्र भी भेज दिया, जिससे फरियादी उसके झांसे में आ गया। इसके बाद शातिर ठग ने लोन प्रक्रिया पूरी करने और प्रोसेसिंग फीस जमा करने का झांसा देकर फरियादी के व्हाट्सएप पर अलग-अलग 7 क्यूआर कोड भेजे। फरियादी ने अपने फोनपे के जरिए एसबीआई खाते से उन क्यूआर कोड्स पर कुल 25,859 रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे ट्रांसफर होने के काफी देर बाद भी जब लोन की राशि फरियादी के खाते में नहीं आई और आरोपी टालमटोल करने लगा, तब उसे साइबर फ्रॉड का अहसास हुआ। फरियादी ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर बाणगंगा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला कायम कर प्रयुक्त मोबाइल नंबर और बैंक खातों के आधार पर पड़ताल शुरू कर दी है। वहीं पुलिस के अनुसार, राजाबाग कॉलोनी निवासी विनोद पिता किशोर हल्दे ने बाणगंगा थाने पहुंचकर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। फरियादी विनोद ने बताया कि उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया, जिसने खुद को प्रसिद्ध ई- कॉमर्स कंपनी मिंत्रा का कर्मचारी बताया। इसके बाद आरोपी ने उन्हें ‘मिंत्रा ई-कॉमर्स वर्किंग’ नाम के एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ दिया। ग्रुप में दिए गए निर्देशों और टास्क को पूरा करने के बहाने जालसाजों ने फरियादी से एक यूपीआई आईडी पर कई बार में कुल 29,202 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। शुरुआत में भरोसा कायम करने के लिए ठगों ने केवल 578 रुपये रिफंड के रूप में वापस किए, लेकिन बाकी बची शेष राशि नहीं लौटाई। जब फरियादी ने अपने रुपये वापस मांगे, तो आरोपियों ने ग्रुप के माध्यम से 60,000 रुपये अतिरिक्त जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। ठगी का शिकार होने पर फरियादी ने पुलिस से संपर्क किया।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 5 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



