इंदौर। शहर के एमजी रोड थाना क्षेत्र में मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के एक प्रकरण में फर्जी दस्तावेजों के जरिए आरोपी को जमानत दिलाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। विशेष न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने कूटरचित कागजात पेश कर अदालत को गुमराह करने वाली महिला जमानतदार के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई विशेष न्यायाधीश, धन शोधन निवारण अधिनियम इंदौर के आदेश क्रमांक 571/2026 (दिनांक 5 अक्टूबर) के परिपालन में की गई है। अदालत द्वारा मामले से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन करने पर यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्त सुनील मिश्रा की जमानतदार निकिता चौहान पति हिमांशु चौहान, निवासी ग्राम सुनाला, तहसील देपालपुर ने न्यायालय में भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका के रूप में फर्जी और कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इन्हीं जाली दस्तावेजों के बल पर अभियुक्त को जेल से जमानत पर मुक्त कराया गया था। मामले की सत्यता की जांच के लिए दस्तावेज देपालपुर तहसीलदार के समक्ष सत्यापन हेतु भेजे गए थे। तहसीलदार द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हो गया कि अदालत में पेश किए गए भू-अधिकार और ऋण से जुड़े कागजात पूरी तरह असत्य और जाली हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्ट्या यह प्रमाणित हुआ कि निकिता चौहान ने कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने और धोखाधड़ी करने की नीयत से जाली दस्तावेज तैयार करवाकर न्यायालय में पेश किए थे। एमजी रोड थाना पुलिस ने अदालत के आदेश और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी महिला निकिता चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचना और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस इस मामले में यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा जाली दस्तावेज कहां तैयार किए गए थे।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 11 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



