केसरी वाटिका बिजासन रोड पर चल रहे चातुर्मास में संत विद्वदरत्न विजय म.सा. एवं मुनिराज डॉ. सिद्धरत्न विजय म.सा. ने जैन समाजजनों को सार्थक प्रवचन दिए। सम्यग्ज्ञान, सम्यग्दर्शन और सम्यक् चारित्र जीवन जैन युवा ने दी। में उतारना ही सच्ची धर्माराधना है, सिद्धचक्र आराधना से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। आत्मकल्याण, सम्यग्ज्ञान और सदाचार का महत्त्व समझाया। उक्त जानकारी राजेश-प्रिया
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 25 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 6 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें


