कथा में महाराज की धर्मपत्नी भी श्रोताओं के बीच शामिल हुई है। महाराज का नर्मदा और क्षिप्रा के बीच कनेक्शन सुनकर वे भी मुस्कुराती नजर आई। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मैं विद्याधाम का ही कृपा पात्र हूं, मेरा जन्म उन्हीं की कृपा से हुआ था। इसलिए भी माँ सरस्वती की मुझ पर कृपा वक्ता के रूप में दिखती है। उल्लेखनीय है कि इंद्रेश महाराज के पिताजी एवं भगवताचार्य कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुरजी महाराज के मुखारविंद से 1994 में विद्याधाम में भागवत कथा का आयोजन हुआ था। तब इंद्रेश महाराज की माता नर्मदा उपाध्याय को विद्याधाम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती महाराज ‘भगवन' ने उन्हें कहा कि अगली कथा 1997 में होंगी तब कथा में आपका पुत्र भी आना चाहिए, इस पर माता ने कहा कि भगवन मेरी तो 3 बेटियां ही है,बेटा तो है नहीं। इस पर भगवन ने आशीर्वाद स्वरूप यह कहा कि 1997 में जो कथा होगी, उसमें कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग में कृष्ण आपका लाला ही बनेगा। उन्होंने यह तक कहा कि श्रावण कृष्ण नवमी को पुत्र का जन्म होगा। इसके बाद 1996 में श्रावण कृष्ण नवमी पर इंद्रेश महाराज का जन्म हुआ। इसके बाद ठाकुर जी महराज और उनकी पत्नी इंद्रेश जी महाराज को गोद में लेकर विद्याधाम लेकर भी आए थे। उनके पिता एवं माता इंद्रेश महाराज का जन्म विद्याधाम की कृपा से ही मानते है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 25 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें


