बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
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इंदौर में जल संकट से निपटने की तैयारी जारी

होटल, हॉस्पिटल, स्कूल-कॉलेज और मॉल में लगेंगे टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट

इंदौर में आगामी जल संकट की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने पानी की खपत कम करने और वैकल्पिक जल स्रोत विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल होटल, अस्पताल, मॉल, बड़े शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक संगठनों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। मकसद यह पता लगाना है कि बड़े संस्थानों को प्रतिदिन कितने पानी की जरूरत होती है और इस मांग का कितना हिस्सा ट्रीट किए गए पानी से पूरा किया जा सकता है।

अब तक सामने आई एमएलडी पानी की जरूरत नगर निगम आयुक्त के अनुसार, होटल, अस्पताल, और उद्योगों से जुड़े संगठनों के साथ चर्चा में अब तक प्रतिदिन करीब 30 एमएलडी पानी की जरूरत सामने आई है। एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन। यह आकलन बड़े संस्थानों की पानी संबंधी आवश्यकताओं को समझने और भविष्य की रणनीति बनाने में मदद करेगा।

बड़े संस्थानों पर फोकस- नगर

निगम की प्राथमिकता उन संस्थानों पर है, जहां पानी की खपत अधिक होती है। होटल, हॉस्पिटल, स्कूल-कॉलेज, मॉल और औद्योगिक इकाइयों में पानी मॉल का उपयोग कई कामों के लिए किया जाता है। निगम इन संस्थानों से चर्चा कर रहा है कि पीने योग्य पानी की जगह किन कामों में ट्रीट किए गए पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पानी की बचत और भविष्य की

रणनीति- नगर निगम अब रहवासी क्षेत्रों, निर्माण क्षेत्र, ऑटोमोबाइल सेक्टर और अन्य बड़े जल उपभोक्ताओं से भी चर्चा करने की तैयारी में है। उद्देश्य शहर में प्रतिदिन होने वाली पानी की खपत का आकलन

निगम आयुक्त ले रहे बड़े संस्थानों की बैठकें, अब तक 30 एमएलडी पानी की जरूरत आई सामने

कर वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करना है। यदि बड़े संस्थान अपने यहां निकलने वाले पानी को ट्रीट कर दोबारा उपयोग में लाते हैं, तो ताजे पानी की मांग घट सकती है। इससे पेयजल संसाधनों पर दबाव कम करने और संभावित जल संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।

क्या है टर्शियरी ट्रीटमेंट

प्लांट? – टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट सीवेज ट्रीटमेंट की उन्नत प्रक्रिया है। इसमें पहले से ट्रीट किए गए गंदे पानी को अतिरिक्त फिल्ट्रेशन और डिसइन्फेक्शन जैसी प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है, ताकि उसकी गुणवत्ता और बेहतर हो सके। इस पानी का उपयोग गुणवत्ता मानकों के अनुसार टॉयलेट फ्लशिंग, बागवानी, कूलिंग टावर और सफाई जैसे कामों में किया जा सकता है। हालांकि, इसे सीधे पीने योग्य मानना सही नहीं है। पेयजल के लिए अतिरिक्त उपचार और निर्धारित मानकों की पुष्टि जरूरी होती है।

देश के बड़े संस्थानों में हो रहा

इस्तेमाल- देश में कई बड़े संस्थान ट्रीट किए गए पानी का पुनः उपयोग कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, इन्फोसिस अपने विभिन्न परिसरों में सीवेज ट्रीटमेंट और उन्नत उपचार तकनीक के जरिए पानी को रिसाइकिल करता है। आईआईटी रुड़की के परिसर में भी टर्शियरी ट्रीटमेंट की व्यवस्था है, जहां उपचारित पानी का उपयोग बागवानी के लिए किया जाता है। ऐसे उदाहरण इंदौर के बड़े संस्थानों के लिए उपयोगी मॉडल बन सकते हैं।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 14 October 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 14 October 2026, पृष्ठ 4