इंदौर नगर निगम के द्वारा चार स्थानों पर नए संयंत्र लगाकर 30 एम एल डी पानी को ट्रीट करने का काम किया जाएगा। ड्रेनेज के पानी को इन संयंत्र पर साफ पानी के रूप में बदलने का काम होगा। इसके लिए निगम के द्वारा आर ओ टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा।
निगम के द्वारा की जाने वाली इस व्यवस्था की जानकारी देने और इससे सभी विभागों तथा बिल्डर कालोनाइजर को जोड़ने के लिए निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के द्वारा कल एक बैठक ली गई। बैठक में मुख्य रुप से शासकीय विभाग जिसके अंतर्गत आई डी ए, रेल्वे, एयरपोर्ट अथर्टी, डी आई सी, एम पी आई डी सी (जिला इंदौर ओर उज्जैन ), पी डब्लू डी, एम पी आर डी सी,मेट्रो के साथ शासकीय अस्पलाल एम स्पेशिलिटी एवं शहर के अन्य बड़े बड़े निजी अस्पताल संगठन के प्रतिनिधि, होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधि, क्रेड़ाई, कॉलोनीनाइजर के प्रतिनिधि आदि शामिल हुए।
सिंघल ने बताया कि नगर निगम उपचारित सीवरेज जल को एक मूल्यवान संसाधन के रूप में अधिकतम उपयोग में लाना चाहता है, जिससे ताजे जल पर निर्भरता कम हो और उपलब्ध पेयजल का बेहतर प्रबंधन हो सके। इस हेतु अर्बन चैलेंज फंड योजना के अंतर्गत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार शहर में चार स्थानों पर तृतीयक जल उपचार संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 30 एमएलडी अर्थात प्रतिदिन 3 करोड़ लीटर होगी। सांवेर औद्योगिक क्षेत्र – 3 एमएलडी, कनाड़िया एमएलडी, लेक – कबीटखेड़ी स्थित 245 एमएलडी एसटीपी परिसर – वाय, सुपर तिगरिया बादशाह 9 एमएलडी, 10 एमएलडी का संयंत्र लगाया जाएगा। एसटीपी में द्वितीयक स्तर तक उपचारित जल को इन संयंत्रों में डिस्क फिल्टर, अल्ट्रा फिल्ट्रेशन (यूएफ), रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) एवं यूवी डिसइन्फेक्शन जैसी आधुनिक
नए भवनों में ड्यूल पाइपिंग का प्रस्ताव
नगर निगम नई भवन अनुज्ञाओं में ड्यूल पाइपिंग सिस्टम अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है, जिसमें एक पाइपलाइन पेयजल हेतु तथा दूसरी टॉयलेट फ्लशिंग एवं अन्य गैर-पेय उपयोगों हेतु होगी। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना, एमवाय अस्पताल के नवीन भवन, इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही एयरोसिटी एवं शहर में निर्मित होने वाले अन्य भवनों में भी ड्यूल पाइपिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।
जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
पूर्ण क्षमता से संचालन होने पर ये संयंत्र प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ लीटर ताजे जल की बचत में सहायक होंगे, जो 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मानक पर 2.2 लाख से अधिक नागरिकों की दैनिक जल आवश्यकता के बराबर है। देश का पहला वॉटर प्लस शहर इंदौर इस पहल के माध्यम से उपचारित सीवरेज जल को एक उपयोगी संसाधन के रूप में स्थापित करेगा।
तकनीकों से और अधिक शुद्ध किया जाएगा। जल के उपयोग के प्रयोजन एवं उसके लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों के आधार पर उपचार प्रक्रिया तय की जाएगी। प्रथम चरण में उपचारित जल पृथक पाइपलाइन के माध्यम से निम्नलिखित गैर-पेय कार्यों हेतु उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें भवनों में टॉयलेट फ्लशिंग, उद्यान एवं लैंडस्केपिंग, निर्माण कार्यों में क्योरिंग एवं धूल नियंत्रण, कूलिंग टावर एवं औद्योगिक प्रक्रियाएँ, वाहन, डिपो एवं सड़कों की धुलाई, सीवर सफाई एवं अग्निशमन के कार्य में इस पानी का उपयोग किया जाएगा। सिंघल ने बताया कि उपचारित जल की आपूर्ति पृथक पाइपलाइन से की जाएगी, जिस पर स्पष्ट पहचान एवं साइनेज रहेंगे, ताकि पेयजल एवं गैर-पेय जल की व्यवस्था पूर्णतः पृथक एवं सुरक्षित रहे। यह परियोजना की शुरुआत है। भविष्य में शासन के दिशा-निर्देशों, निर्धारित मानकों तथा सभी हितधारकों से समुचित परामर्श के उपरांत उपचारित जल के पेय उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकेगा।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 13 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



