ऐसे में योजना का अगला अहम पड़ाव एजेंसी का चयन और उसके बाद प्लांट की स्थापना है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और कार्यादेश जारी होने के बाद ही यह साफ होगा कि देवगुराड़िया में प्लांट कब तक खड़ा होकर नारियल के खोल को कचरे से उत्पाद में बदलना शुरू करेगा। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड में परियोजना अवार्ड के इंतजार में है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 20 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




