जाल सभागृह में डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा' कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अवसर और चुनौतियां 'विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि ए आई भविष्य में भस्मासुर बन सकता है, मनुष्य को चिंता करना होगी कि एआई को कितना विकसित करें। मनुष्य ने मानवता के सहयोग के लिए ए आई का आविष्कार यह समझते हुए किया था,कि यह मनुष्य के कल्याण के लिए सहयोगी एवं उपयोगी होगी, मगर जिस तरह से एआई का विकास हुआ है,आज समूची दुनिया ए आई के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। एआई एक और, मेडिकल, कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में बहुत ज्यादा उपयोगी सिद्ध हो रहा है,वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध सहित विभिन्न प्रकार से इसके दुष्परिणामों को लेकर भी सारी दुनिया भयभीत है कि यह समूची मानवता के लिए भस्मासुर बनता जा रहा है। डॉ. संजीव टोकेकर, डॉ. श्रद्धा मसीह,प्रो असद खान, डॉ. संदीप नारूलेकर, अनहद त्यागी, मदीहा मंसूरी, अथर्व शित्रे, मोहसरा खान, तथा हृदया एकतारे ने सम्बोधित किया। डॉ. निशा दुबे, आलोक खरे, डॉ. गौतम कोठारी, श्याम सुंदर यादव, रामेश्वर गुप्ता, शफी मोहम्मद शेख, श्याम पांडे, डॉ. ओपी जोशी, डॉ. एसएल गर्ग, डॉ. दिलीप वाघेला, हरे राम बाजपेई, राजेंद्र गोयल, कंचन तारे, रंजना नाईक, प्रणिता दीक्षित, अशोक मित्तल ने अपनी भूमिका निभाई।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 25 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें


