शहर में पानी के संकट की संभावना के बीच तेजी से बोरिंग होने का काम शुरू हो गया है। सभी को आशंका है कि आने वाले समय में जिला प्रशासन के द्वारा बोरिंग पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। ऐसे में हर कोई जल्दी बोरिंग करवा लेना चाहता है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए बोरिंग करने वालों ने भी अपनी कीमत बढ़ा दी है।
इंदौर को वैसे तो 40 इंच बारिश की जरूरत रहती है लेकिन इस बार करीब 24 इंच ही बारिश हुई है, ऐसे में इंदौर में कम बारिश के कारण हालत खराब है। तालाब पूरे नही भर पाए हैं। पिछले साल गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में इंदौर शहर के बोरिंग सूख गए थे। इस साल तो बारिश नहीं होने के कारण बोरिंग को रिचार्ज करने के लिए जमीन के अंदर कोई बहुत ज्यादा पानी भी नहीं भेजा जा सका है। ऐसे में आने वाली गर्मी के समय की स्थिति का सभी को अंदाजा हो रहा है। सभी को यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में इंदौर में पानी का बड़ा संकट आने वाला है। इस संकट से निपटने के लिए इंदौर नगर निगम जहां अपनी तैयारी कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ नागरिकों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इन नागरिकों को इस बात का एहसास है कि नगर निगम के द्वारा संकट के दौर में नर्मदा का पानी बहुत ज्यादा या आवश्यकता की पूर्ति के जितना नहीं दिया जा सकेगा। ऐसी स्थिति में हर व्यक्ति की रुचि खुद का अपना पर्सनल बोरिंग करवा लेने में है। आने वाले दिनों में होने वाली पानी की किल्लत को देखते हुए बड़ी संख्या में बोरिंग कराए जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में रात दिन बोरिंग मशीनें चल रही हैं। जिले में लगभग 200 से 250 बोरिंग मशीनें रात दिन बोरिंग कर रही है। क्योंकि अभी बोरिंग पर प्रतिबंध नहीं है और अनुमति भी नहीं लेनी है इसके चलते ज्यादा से ज्यादा लोग प्रयास कर रहे हैं कि गहरा बोरिंग करवा लें। जिन क्षेत्रों में नर्मदा लाइन है उनमें भी लोग अपना बोरिंग करवा रहे हैं। बताया जाता है कि इसके चलते बोरिंग के रेट जहां चार-पांच दिनों पहले तक 105 रुपए फीट थे अब यह रेट 125- 130 रुपए फीट तक पहुंच गए हैं। अब जिले में शहरी क्षेत्र में अधिकांश बोरिंग 500- 600 फीट तक किए जा रहे हैं वहीं ग्रामीण क्षेत्र में बोरिंग 700-800 फीट तक किए जा रहे हैं। इस समय दिन और रात मं तेज गति के साथ अलग-अलग क्षेत्र में बोरिंग की मशीन धडल्ले से काम करते हुए नजर आ रही है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 12 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



