पनों का अचेतन मन और कल्पना से गहरा संबंध है। सही दिशा में देखे गए सपने, जब दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और अनुशासन से जुड़ते हैं, तभी जीवन में वास्तविक सफलता मिलती है। पढ़िए अशोक कुमार का लेख… Success Guide: मानव जीवन की उत्पति के साथ ही उसकी मनोदशा के कई आयाम उसे अपनी परिधि में बांधे हुए है। व्यक्ति अपनी दिनचर्या के विभिन्न पहलुओं से आबद्ध होकर उसके निर्वहन की दिशा में सतत नैसर्गिक भूमिका में लैस होते हैं। इस दौर में उसके कार्यों में रचनात्मक और नकारात्मक अंशों के मिश्रण से अनुभूति अध्याय के अनेक मर्म निरंतर प्रकट होते रहते हैं। व्यक्ति के जाग्रत अवस्था में रोजमर्रा के वैसे इच्छित मनोभाव, जो मूर्तरूप नहीं ले पाते, वे हमारे अचेतन मन के कोश में संग्रहित हो अक्सर सपनों के रूप में उजागर होते हैं। सपनों के सरोवर में हमारी कल्पनाओं के अंश भी निरंतर यात्रा में लीन रहते हुए मस्तिष्क में जमा हो जाते हैं। दरअसल, सपने आंखें बंद होने पर खुलने वाली एक ऐसी दुनिया है, जिसे किसी ने देखा नहीं, बल्कि चेतन मन में सिर्फ महसूस किया है। जागी हुई हालत में हम जो देखते हैं, सुनते हैं, सोचते हैं या किसी कार्य को अधूरा छोड़ देते हैं, वही रात में अपने रूप बदलकर हमारी अचेतन अवस्था में सपने बुनने लगता है। इस दौर में हमारा मन कई उड़ान भरता है, जैसे कि कभी हम किसी के साथ खुशी के पल जी रहे हैं, कभी किसी से उलझ रहे हैं या कभी बचपन के आंगन में पहुंच कर भूली-बिसरी स्मृतियों में सजीव हो जाते हैं। दिन में समाज से, रिश्तों से, खुद से समझौता कर लेने के बाद जब रात में शरीर नींद में लीन होता है, हमारा संवेदनशील मन ईमानदार हो, तो बीते पलों की आहट सुनते हुए दिन में दबी इच्छा रात में चित्र का आकार ले लेती है। इसका सिरा अतीत का कोई संदर्भ भी हो सकता है। पूर्व राष्ट्रपति कलाम युवा पीढ़ी को उत्साहित करते हुए कहा करते थे कि ‘रात के सपने नींद की हालत में बिस्तर पर भले आते हों, लेकिन नींद से बाहर जागी हुई स्थिति में वैचारिक सपने उस युवक को सोने नहीं देते,जिसने अपने भविष्य निर्माण का दृढ़ संकल्प लिया है। मनोविज्ञान के जनक सिगमंड फ्रायड का कथन है कि ‘सपनों की व्याख्या ही अचेतन मन को समझने का मार्ग है।’ वे मानते थे कि सपनों की नगरी में हमारी सुषुप्त या दमित इच्छाओं का भेष बदलकर किया गया प्रदर्शन व्यक्ति का चिंतन प्रतिबिंब है। अध्ययन बताते हैं कि स्वप्न और कल्पना में आंतरिक समन्वय की कड़ी बेहद प्रभावशाली है और दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। सपनों की सूक्ष्म तरंग को लोकहित के लिए आविष्कारों की जननी कहा जा सकता है। व्यक्ति भी इसी प्रक्रिया पथ पर चलकर भविष्य में उद्यमी, विद्यार्थी, डाक्टर, अभियंता, शिक्षक, प्रशासक या वैज्ञानिक बनने का सपना देखता है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 13 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें



