मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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पानी की किल्लत बढ़ने के बाद जल्द लग सकता है बोरिंग खुदाई पर प्रतिबंध

रात में हो रहे बोरिंग के शोर से परेशान लोग, बोरिंग वेंडर बोले बढ़ी डिमांड भूजल स्तर गिरा

शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर और पानी की बढ़ती मांग के बीच बोरिंग खुदाई पर प्रतिबंध लगाने को लेकर जल्द निर्णय होने की संभावना है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने इस संबंध में कलेक्टर शिवम वर्मा को पत्र लिखा था। इस पत्र को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक निर्णय सामने नहीं आया है। लगातार बढ़ते भूजल दोहन और बड़े निर्माण कार्यों में पानी की खपत को देखते हुए इस मामले में जल्द कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। बोरिंग मशीन संचालित करने वाले वेंडरों ने बताया कि वर्तमान में बोरिंग की डिमांड बढ़ गई है, आने वाले दिनों में पानी की किल्लत के कारण लोग लगातार बोरिंग करवा रहे हैं 400 से 700 फीट तक बोरिंग करने के बाद पानी मिल रहा है। जिले में रोजाना 10 से 15 स्थानों पर बोरिंग किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। आवासीय क्षेत्रों में घरों और अपार्टमेंट के निर्माण के दौरान पानी की जरूरत पूरी करने के लिए बोरिंग कराए जा रहे हैं। इससे भूजल पर दबाव बढ़ रहा है। दूसरी ओर, कई इलाकों में बोरिंग मशीनों के देर रात तक चलने से रहवासियों को शोर और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

निर्माण कार्यों में पानी की खपत बढ़ी

शहर में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान नर्मदा जल और बोरिंग के पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर गृह निर्माण में नींव, कंक्रीट और अन्य निर्माण संबंधी कामों के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। ऐसे में पेयजल की मांग के साथ निर्माण कार्यों में होने वाली खपत भी जल प्रबंधन के लिए चुनौती बन रही है। यदि भूजल का दोहन इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है। बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कलेक्टर शिवम वर्मा को पत्र लिखकर कार्रवाई का विषय उठाया है। पत्र भेजे जाने के बाद एक माह से अधिक समय गुजर चुका है। अब लगातार घटते भूजल स्तर और पानी के बढ़ते उपयोग को देखते हुए प्रशासन के स्तर पर जल्द निर्णय होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, प्रतिबंध की समयसीमा और उसके दायरे को लेकर आधिकारिक निर्णय सामने आना बाकी है। बोरिंग की बढ़ती गतिविधियों का असर केवल भूजल तक सीमित नहीं है। आवासीय कॉलोनियों में देर रात तक मशीनें चलने से लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। रहवासी बोरिंग के लिए समय निर्धारित करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग कर रहे हैं। यदि प्रतिबंध या नई गाइडलाइन लागू होती है, तो बोरिंग की अनुमति, समय और उपयोग को लेकर नए नियम बनाए जा सकते हैं।

भूजल बचाने की चुनौती

इंदौर में जल संकट से निपटने के लिए केवल वैकल्पिक जल स्रोत बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और निर्माण कार्यों में पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर भी जोर देना होगा। अब नजर प्रशासन के निर्णय पर है, जिससे तय होगा कि बोरिंग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा या इसके लिए कोई नियामक व्यवस्था लागू की जाएगी।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 13 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 13 अक्टूबर 2026, पृष्ठ 5