इंदौर। नगर निगम के खजाने पर जलकर की बकाया राशि का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर में करीब 700 करोड़ रुपए जलकर बकाया है, लेकिन निगम का राजस्व अमला इसकी वसूली में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रहा है। अब इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए निगम ने पानी के अवैध कनेक्शनों को राजस्व के दायरे में लाने की तैयारी की है। इसके लिए शहर में 21 दिन का विशेष अभियान चलाया जाएगा। निगम का लक्ष्य करीब 1.75 लाख अवैध नल कनेक्शनों को वैध करना है, ताकि पानी की चोरी रुके और हर उपभोक्ता से जलकर वसूला जा सके। शहर में वर्तमान में करीब 3.15 लाख वैध नल कनेक्शन हैं, जबकि 1.75 लाख कनेक्शन अवैध बताए जा रहे हैं। यानी बड़ी संख्या में लोग नर्मदा का पानी इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन इसके बदले नगर निगम को कोई जलकर नहीं दे रहे। दूसरी ओर निगम को नर्मदा का पानी लाने, शुद्ध करने और घरों तक पहुंचाने में भारी खर्च करना पड़ता है। ऐसे में अवैध कनेक्शन निगम के राजस्व को दोहरा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
2500 और 6000 रुपए में होंगे वैध
निगम ने कनेक्शन नियमित करने के लिए दरें भी तय की हैं। शहर की मलिन बस्तियों में अवैध नल कनेक्शन को 2500 रुपए और सामान्य कॉलोनियों में 6000 रुपए देकर वैध कराया जा सकेगा। इससे पहले करीब तीन साल पूर्व चलाए गए अभियान में 25 हजार अवैध कनेक्शन वैध किए गए थे। अब नए अभियान से निगम को इससे कहीं अधिक कनेक्शन नियमित होने की उम्मीद है।
65 करोड़ की सालाना आय, 700 करोड़ बकाया
नगर निगम को हर साल जलकर से लगभग 65 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है, जबकि बकाया राशि करीब 700 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यह स्थिति बताती है कि जलकर वसूली में निगम का सिस्टम कितना कमजोर है। नए कनेक्शनों को वैध करने के साथ पुराने बकायादारों से वसूली भी बड़ी चुनौती होगी।
अब वैध उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
निगम की योजना है कि नियमित बिल जमा करने वाले और वैध कनेक्शनधारियों को पानी की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाए। साथ ही अवैध कनेक्शन और पानी की चोरी पर कार्रवाई हो। अब 21 दिन का अभियान निगम के लिए राजस्व बढ़ाने और जल वितरण व्यवस्था सुधारने की बड़ी परीक्षा साबित होगा।
यह खबर सिटी ब्लास्ट अख़बार के 7 November 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें


