दीपावली के त्योहार पर बाजारों में रौनक के बावजूद खाद्य तेल, शकर और इनसे जुड़े विभिन्न उद्योगों में बढ़ती महंगाई तथा कच्चे माल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। मिठाई, नमकीन, बिस्किट, बेकरी, चॉकलेट, कन्फेक्शनरी, आइसक्रीम, डेयरी, स्नैक्स, फ्रोजन फूड और अन्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के सामने उत्पादन लागत बढ़ने तथा मुनाफा घटने की चुनौती खड़ी हो गई है। खाद्य तेल एवं शकर के प्रमुख थोक व्यापारी तथा रोहित ट्रेडर्स के संचालक रोहित गुप्ता ने बताया कि पिछले वर्ष दीपावली सीजन में उनका कारोबार लगभग 500 टन था, जो इस वर्ष घटकर 250 से 300 टन रह गया है। इस प्रकार बिक्री की मात्रा में करीब 40 से 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। गुप्ता के अनुसार शकर की कीमतों में अस्थिरता सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। अक्टूबर में महाराष्ट्र के एक्स-मिल शकर भाव में 20 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली, जबकि खाद्य तेल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे मिठाई, बिस्किट, कन्फेक्शनरी, आइसक्रीम और पेय पदार्थ निर्माताओं के लिए उत्पादन लागत निर्धारित करना कठिन हो रहा है। वहीं नमकीन, बेकरी और स्नैक्स उद्योग खाद्य तेल, कमर्शियल गैस, प्लास्टिक पैकेजिंग, बिजली, परिवहन और मजदूरी की बढ़ती लागत से परेशान हैं। कई निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा के कारण बढ़ी हुई लागत का पूरा भार ग्राहकों पर डालना संभव नहीं हो पा रहा है। निर्यात आधारित खाद्य उद्योगों के सामने अंतरराष्ट्रीय मालभाड़े, शिपमेंट में देरी और भुगतान चक्र लंबा होने जैसी चुनौतियां भी हैं। गुप्ता ने बताया कि पहले व्यापारी त्योहारों से पहले बड़े स्तर पर स्टॉक तैयार करते थे, लेकिन अब बाजार की अनिश्चितता, सीमित मांग और उधारी में फंसी पूंजी के कारण आवश्यकता के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। ‘आज व्यापारियों और उद्योगपतियों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कच्चा माल महंगा हो रहा है, मुनाफा सीमित है और पहले जितना व्यापार करने के लिए अब कहीं अधिक पूंजी लगानी पड़ रही है। महंगाई की मार केवल आम उपभोक्ता पर नहीं, बल्कि उत्पादन करने वाले उद्योगों और थोक व्यापारियों पर भी पड़ रही है।’ गुप्ता ने कहा कि कीमतों में स्थिरता, समय पर भुगतान और उद्योगों को पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध होने से बाजार को राहत मिल सकती है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 25 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें


