गोम्मटगिरि ट्रस्ट के दो दर्जन ट्रस्टियों ने इस्तीफे की पेशकश मुनि पुंगव 108 सुधा सागर म.सा. के समक्ष की, जो दिगम्बर जैन समाज में चर्चा का विषय बन गया है। दिगम्बर जैन समाज के सोशल मीडिया ग्रुप पर कुछ पुराने वरिष्ठ समाजजनों ने लिखा कि जब गोम्मटगिरि का पहाड़ियों पर निर्माण की बात आई थी तब स्थितियां क्या थी और कैसे जमीन अलार्ट हुई और कैसे ट्रस्ट बना और किस तरह से धन की दिक्कत को दूर करते हुए कार्य किया गया। इस कार्य में इंदौर के दिगम्बर जैन समाजजनों का बड़ा योगदान है। अब जब देशभर से 1 करोड़ रु. में आजीवन ट्रस्टी बनाने की बात उठी तो सोशल मीडिया ग्रुप पर भी लिखा जा रहा है और व्यक्तिगत रूप से भी बोला जा रहा है कि इंदौर में भी पूंजीपतियों की कमी नहीं है, लेकिन जिनके पास इतना बड़ा पैसा 1 करोड़ रु. देना का नहीं है क्या वे गोम्मटगिरि ट्रस्ट पर सेवा नहीं दे पाएंगे। बाहर के ट्रस्टी बनेंगे तो क्या वे आयोजन में या किसी निर्माण कार्य में या जो दूसरे समाज से विवाद की स्थिति की बाधा बनी हुई है उसमें खड़े रह पाएंगे, जरूरत पड़ी तो न्यायालय भी जाना पड़ता है और जब गोम्मटगिरि में कब्जे की बात आती है तो दूसरे समाज के लोगों से किला भी लड़ाना पड़ता है, यह देखना चाहिए कि प्रारंभिक दौर में किस परिवार ने सहयोग किया, किसने काम किया वे सब दरकिनार हो जाएंगे। प्रारंभिक दौर गोम्मटगिरि की जमीन से लेकर निर्माण तक का इतिहास पता होना चाहिए यह बात भी उठ रही है। अभी दो
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 1 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




