सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
इंदौर की ताज़ा खबरें – City Blast Indore Hindi News
ब्रेकिंग
इंदौर

इंदौर में बारिश के लिए फिर पूजा-पाठ, अब 10 इंच बारिश की दरकार

दिसंबर-जनवरी से बोरिंग सूखने का खतरा

मानसून विदाई की ओर है और इंदौर में बारिश की कमी अब आने वाले महीनों के जलसंकट की चिंता में बदलने लगी है। शहर में एक बार फिर अच्छी बारिश के लिए मंदिरों में पूजा-पाठ, यज्ञ और हवन शुरू हो गए हैं। लोगों की प्रार्थना है कि मानसून जाते-जाते इतना बरस जाए कि बारिश का आंकड़ा कुछ सुधरे और अगले साल गर्मी तक पानी का संकट टाला जा सके। मौजूदा हालात में करीब 10 इंच अतिरिक्त बारिश की जरूरत बताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी बारिश होने पर भी यह पर्याप्त नहीं होगी, लेकिन जलसंकट से राहत जरूर मिल सकती है।

सूखे जलस्रोत दे रहे खतरे का

संकेत- लगातार बारिश नहीं होने से शहर के नदी-नाले और कई तालाब अभी से सूखे नजर आने लगे हैं। इसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ने की आशंका है। यदि जाते मानसून में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो दिसंबर-जनवरी से ही कई क्षेत्रों में बोरिंग का जलस्तर नीचे जाने और गर्मियों में संकट गहराने की स्थिति बन सकती है। नगर निगम की सबसे बड़ी चिंता शहर की जलापूर्ति को लेकर है। बारिश कम होने की स्थिति में आने वाले समय में नर्मदा ही प्रमुख भरोसा रह जाएगी। स्थानीय जलस्रोतों और भूजल पर दबाव बढ़ने की आशंका के बीच निगम ने पानी बचाने और भूजल रिचार्जिंग पर जोर बढ़ा दिया है। पितृपक्ष के 15 दिनों में भी यह सिलसिला जारी रखने की तैयारी है।

एक लाख नोटिस, 40 हजार

से अधिक रिचार्जिंग- नगर निगम

जलकार्य समिति प्रभारी बबलू शर्मा के मुताबिक कम बारिश के कारण जलसंकट की आशंका को देखते हुए निगम ने पानी बचाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। घरों में वाटर रिचार्जिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। निगम के अनुसार अब तक करीब एक लाख नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि निगम सीमा में 40 हजार से अधिक वाटर रिचार्जिंग सिस्टम लगाए जा चुके हैं। नियमों का पालन नहीं करने वालों पर पेनल्टी भी की जा रही है।

निगम द्वारा पानी के संग्रहण के लिए भूमिगत विशाल टंकी बनाने का काम भी किया जा रहा है। अधिकारियों का जोर बारिश की हर बूंद को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने पर है।

अब सवाल बारिश का नहीं, पानी बचाने का भी- इंदौर में

मानसून की विदाई के साथ अब चिंता सिर्फ इस बात की नहीं है कि कितनी बारिश होगी, बल्कि यह भी है कि गिरी हुई बारिश में से कितना पानी बचाया जा सका। ऐसे में वर्तमान बारिश ही आने वाली गर्मी के संकट की गंभीरता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 27 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें