सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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पांच अस्पतालों का पानी दूषित निकला

नगर निगम के द्वारा कराई गई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस जांच में इंदौर के पांच प्रमुख सरकारी अस्पतालों के पानी के नमूने फेल पाए गए हैं।…

नगर निगम के द्वारा कराई गई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस जांच में इंदौर के पांच प्रमुख सरकारी अस्पतालों के पानी के नमूने फेल पाए गए हैं। इस पानी में शरीर के लिए नुकसानदायक बैक्टीरिया मिला हुआ निकला है। भागीरथपुरा में हुए जल हादसे के बाद से इंदौर नगर निगम के द्वारा समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्र के पानी के नमूने लेकर उसकी अपनी प्रयोगशाला में जांच करवाई जाती है। इस कड़ी में नगर निगम के द्वारा पिछले दिनों महाराजा यशवंत राव अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल, जिला अस्पताल, पीसी सेठी अस्पताल और मेंटल अस्पताल के पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। इन नमूने की जांच रिपोर्ट अब सामने आ गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार इन अस्पताल में मरीज और उनके परिजनों के द्वारा उपयोग किया जा रहा पानी पीने के लायक नहीं पाया गया है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट में इस पानी में बैक्टीरिया पाया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि पीने के पानी की लाइन में ड्रेनेज की लाइन मिल गई है जिसके कारण इस लाइन में मल और मूत्र का पानी आ रहा है। इन सभी अस्पतालों में पीने के पानी के लिए बोरिंग के पानी का उपयोग किया जाता है। महाराजा यशवंत राव अस्पताल में बोरिंग के पानी के साथ नर्मदा के पानी का भी उपयोग किया जाता है। लेकिन यहां पर इन दोनों पानी को मिक्स करते हुए टंकी में भरा जाता है। जिसके कारण नर्मदा का पानी भी अशुद्ध और गंदा हो जाता है। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद नगर निगम के द्वारा एमजीएम मेडिकल कॉलेज के लिए और जिला कलेक्टर के पास रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। इसके साथ निगम की ओर से इन सभी अस्पताल की अधीक्षक को इस रिपोर्ट की सूचना देते हुए बोरिंग के पानी का किसी भी हालत में किसी भी तरह से कोई उपयोग नहीं करने की चेतावनी भी दी गई है। अभी नगर निगम के द्वारा इन अस्पतालों के बोरिंग को सील करने की कार्रवाई नहीं की गई है। इस बारे में पूछे जाने पर निगम के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में यदि बोरिंग के पानी का उपयोग बंद नहीं किया जाता है तो निगम कदम भी उठा सकता है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 3 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें