सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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झांकियों की परंपरा जरूरी, पर प्रशासन की सख्ती ठीक नहीं-निहोरे

युवा नेता राहुल निहोरे ने बयान जारी कर कहा कि अनंत चतुर्दशी पर परम्परागत झांकियां निकाली गई। इंदौर की सांस्कृतिक पहचान और शहर की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है। हर…

झांकियों की परंपरा जरूरी, पर प्रशासन की सख्ती ठीक नहीं-निहोरे

युवा नेता राहुल निहोरे ने बयान जारी कर कहा कि अनंत चतुर्दशी पर परम्परागत झांकियां निकाली गई। इंदौर की सांस्कृतिक पहचान और शहर की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में शहरवासी अपने परिवार के साथ झांकियां देखने के लिए सड़कों पर आते हैं। झांकियां तैयार करने में समय लगता है और इसी लिए लोग कलाकारों की कला को देखने रात में घर से बाहर निकलते है। पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था रखे अच्छी बात है लेकिन ज्यादा सख्ती से लोग परेशान हो उठे थे। पुलिस, प्रशासन ने बिना वजह इतनी बेरिकेटिंग और सख्ती रखी जिससे परिवार और महिलाओ बच्चों को आने मे परेशानी हुई। निहोरे ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की सख्ती की सोच में बदलाव की आवश्यकता है। इस बार शासन- प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर की गई सख्ती के चलते कई मिल झांकी समितियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जगह-जगह दूर-दूर तक लगाए गए बैरिकेड्स और कड़ी व्यवस्थाओं के कारण आम नागरिकों, विशेषकर परिवारों को झांकियों तक पहुंचने में असुविधा हुई। इसका प्रभाव चल समारोह मे कम भीड़ के रूप मे दिखा। युवा नेता राहुल निहोरे ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी लेकिन व्यवस्था होनी जिससे की वर्षों पुरानी झांकी परंपरा और आम जनता की सहभागिता प्रभावित न हो। मिलों की झांकियां इंदौर की पहचान हैं और इन्हें तैयार करने वाली समितियों की महीनों की मेहनत और तपस्या का सम्मान है, ऐसी भी चाहिए शहर किया जाना चाहिए। झांकियां देखने आने वाले परिवारों को भी सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रशासन, पुलिस और झांकी समितियों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर ऐसी व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता और झांकी समितियों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जाए। प्रशासन को इस आयोजन को केवल एक दिन की चुनौती न मानकर इंदौर के गौरव और वर्षों पुरानी परंपरा के रूप में देखना चाहिए।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 28 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें