अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आह्वान पर 100 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने अभियान का समर्थन किया और व्यापारियों ने एक दिन नगद कारोबार कर अपना विरोध दर्ज कराया। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने विरोध को अलग अंदाज में सामने रखा। एसोसिएशन अध्यक्ष अक्षय जैन की अगुवाई में राजबाड़ा पर सैकड़ों यूपीआई क्यूआर कोड स्टैंड और भुगतान उपकरणों को एक जगह एकत्रित कर काले कपड़ों से ढंककर सामूहिक प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में एक साथ ढंके का उपयोग नहीं करने से डिजिटल कारोबार प्रभावित हुआ है। अक्षय जैन ने बताया कि व्यापारियों के विरोध का उद्देश्य डिजिटल भुगतान के खिलाफ जाना नहीं, बल्कि 2 हजार रु. से अधिक के लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराना है। व्यापारियों ने कहा कि वर्षों से ग्राहकों और कारोबारियों के बीच यूपीआई भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब इस पर अतिरिक्त लागत आने से छोटे और मध्यम व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इसी चिंता को लेकर ‘नो यूपीआई डे’ के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया गया।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 24 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




