सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
इंदौर की ताज़ा खबरें – City Blast Indore Hindi News
ब्रेकिंग
इंदौर

तीन सरकारी कॉलेजों को तीन साल में भी नहीं मिला खुद का भवन

अब 2028 तक संभावना, इसी वजह से नहीं हो रहे एडमिशन, ग्रामीण कॉलेजों में नाममात्र के एडमिशन

तीन सरकारी कॉलेजों को तीन साल में भी नहीं मिला खुद का भवन

पिछले चार साल में इंदौर जिले में शुरू हुए चार में से तीन सरकारी कॉलेजों को खुद के भवन नहीं मिल पाए हैं। जमीन इन सभी को मिल गई है लेकिन भवन नहीं बने हैं। अब कहा जा रहा है कि 2028 तक बन जाएंगे। इन कॉलेजों में इस बार एडमिशन को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। बेटमा, खजराना और कंपेल कॉलेज के पास खुद का भवन नहीं है। हालांकि फिर भी शहरी क्षेत्र के खजराना शासकीय कॉलेज में 960 एडमिशन हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय कंपेल कॉलेज में सिर्फ 60एडमिशन हुए हैं। बेटमा सरकारी कॉलेज में भी इस साल फर्स्ट ईयर में महज 90 एडमिशन हो पाए हैं। यानी दोनों कॉलेजों में एडमिशन का आंकड़ा सौ पर भी नहीं पहुंच पाया है। जबकि खुद के भवन वाले पहले से चल रहे 11 सरकारी कॉलेजों में 1 हजार से लेकर साढ़े पांच हजार तक नए एडमिशन हुए हैं। होलकर साइंस और जीएसीसी इस बार भी एडमिशन के मामले में सबसे आगे रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कॉलेजों में एडमिशन का क्रेज जबरदस्त बढ़ा है, लेकिन दोनों नए ग्रामीण कॉलेजों में एडमिशन बहुत कम होने के कई कारण हैं। खुद का भवन न होना और सुविधाओं की कमी तो एक बड़ा कारण है। साथ ही फैकल्टी और नॉन टीचिंग स्टाफ की पर्याप्त संख्या न होना भी बड़ा कारण है। इसके अलावा बीएससी छात्रों के लिए रिसर्च लैब की कमी, स्पोर्ट्स फैसेलिटी न होना भी एक प्रमुख कारण है। सीनियर प्रोफेसर डॉ. एमएम पांडे कहते हैं कि सरकारी कॉलेजों में एडमिशन का क्रेज बहुत बढ़ा है, लेकिन आजकल स्टूडेंट्स बेहतरीन पढ़ाई, हर विषयों की फैकल्टी की उपलब्धता और संस्थान की साख भी देखते हैं।

अब बंद हो गए हैं नए

एडमिशन- कॉलेजों में एडमिशन बंद हो गए हैं। इस बार सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में बंपर एडमिशन हुए हैं। इंदौर के कॉलेजों में अंतिम तारीख तक बीकॉम और बीएससी की भी करीब 12 से 13 फीसदी सीटें ही खाली रह गईं हैं, जबकि पिछले साल तक यह संख्या 45 फीसदी तक थी। बीए की जरूर 20 प्रतिशत तक सीटें खाली रही हैं। वहीं, डीटीई काउंसलिंग के जरिए हुए बीबीए और बीसीए की लगभग 98 फीसदी सीटें भर गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग की ही काउंसलिंग में शामिल एमए, एमकॉम और एमएससी की भी 13 से 14 फीसदी तक सीटें नहीं भर पाई हैं। वहीं, एलएलबी, बीए एलएलबी जैसे लॉ कोर्स की भी इस बार बमुश्किल सात से आठ फीसदी सीटें खाली हैं।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 9 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

📰 अख़बार की कटिंग

सिटी ब्लास्ट, 9 अक्टूबर 2026, पृष्ठ 8