सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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नियम हैं, फिर सड़क पर क्यों दिख रहे ऐसे स्ट्रक्चर?

मुताबिक शहर में कुल एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में विज्ञापन लगाने का प्रावधान है। अभी इसका करीब 25 प्रतिशत ही उपयोग हुआ है। विज्ञापन एजेंसियों से निगम को सालाना करीब…

नियम हैं, फिर सड़क पर क्यों दिख रहे ऐसे स्ट्रक्चर?

मुताबिक शहर में कुल एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में विज्ञापन लगाने का प्रावधान है। अभी इसका करीब 25 प्रतिशत ही उपयोग हुआ है। विज्ञापन एजेंसियों से निगम को सालाना करीब 8 से 10 करोड़ रुपए का राजस्व मिल रहा है। अपर आयुक्त का कहना है कि विज्ञापन नियमों के अनुसार ही लगाए जा रहे हैं और जहां से शिकायत मिलती है, वहां कार्रवाई की जाती है। विज्ञापन के आकार और स्ट्रक्चर की ऊंचाई के लिए भी नियम निर्धारित हैं। अधिक ऊंचाई वाले होर्डिंग डिवाइडर पर नहीं लगाए जा सकते। फुटपाथ पर भी आकार और स्थान के नियमों का ध्यान रखा जाता है। विज्ञापन के लिए बनाए जाने वाले स्ट्रक्चर की जांच पहले किए जाने की बात भी निगम ने कही है।

निगम के दावे और शहर की तस्वीर के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चौराहों और डिवाइडरों पर कई जगह बड़े विज्ञापन स्ट्रक्चर नजर आ रहे हैं। आरोप है कि विज्ञापन एजेंसियां निर्धारित साइज और ऊंचाई के नियमों के विपरीत भी स्ट्रक्चर खड़े कर रही हैं। ऐसे में निगरानी और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी मुद्दे को लेकर प्रहलाद पांडे और उनकी पत्नी अनशन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शहर में अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि फुटपाथ, डिवाइडर और चौराहों पर लगाए जा रहे स्ट्रक्चर कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

2015-16 में हटाएं थे शहर से अवैध होर्डिंग्स

करीब एक दशक पहले शहर ने अवैध विज्ञापनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखी थी। 2015 और 2016 में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त मनीष सिंह के कार्यकाल में अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाने का अभियान चलाया गया था। प्रमुख चौराहों से विज्ञापन स्ट्रक्चर हटाए गए थे और शहर का स्वरूप काफी साफ नजर आने लगा था। अब उसी शहर में फिर चौराहों, डिवाइडरों और फुटपाथों पर विज्ञापन स्ट्रक्चर दिखाई देने लगे हैं। कल पाटनीपुरा का हादसा इस बहस को फिर सामने ले आया है कि विज्ञापन से मिलने वाला राजस्व जरूरी है, लेकिन उसकी कीमत सड़क पर चल रहे लोगों की सुरक्षा तो नहीं हो सकती।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 24 सितम्बर 2026 के अंक में पृष्ठ 5 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें