लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निगम को एक ही विकास कार्य के लिए नौ-नौ बार टेंडर निकालने पड़ रहे हैं तो शहर के विकास कार्यों में तेजी कैसे आएगी। विपक्ष ने इसके लिए निगम पर ठेकेदारों के 1600 करोड़ रुपए बकाया होने का आरोप लगाया है।
हालांकि निगम के लेखा विभाग ने वर्तमान देनदारी करीब 600 करोड़ रुपए बताई है। इसके बावजूद ठेकेदारों का काम करने से दूरी बनाना चिंता का विषय है।
भुगतान में देरी सबसे बड़ी वजह
नगर निगम कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन से जुड़े एक ठेकेदार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि समय पर भुगतान नहीं मिलना सबसे बड़ी समस्या है। ठेकेदारों का कहना है कि करोड़ों रुपए के काम कराने के बाद भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। भुगतान मांगने पर भी कई बार किश्तों में राशि मिलती है।
नौवीं बार निकला टेंडर
8 अगस्त 2026 की ताजा ई-टेंडर सूची में जोन-4 के जोनल कार्यालय में नया कमरा और अन्य निर्माण कार्य के लिए नौवीं बार टेंडर कॉल किया गया है। वहीं भागीरथपुरा वार्ड-11 में सड़क निर्माण के लिए छठी बार टेंडर जारी हुआ है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के निवास क्षेत्र सुदामा नगर के ई- सेक्टर वार्ड-82 में शंकराचार्य द्वार से टोयोटा सर्विस सेंटर तक सड़क निर्माण का टेंडर चौथी बार कॉल किया गया है। ठेकेदार नहीं मिलने से करीब 70 करोड़ रुपए के विकास कार्य अटके हुए हैं। जनकार्य विभाग के प्रभारी एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने कहा कि घटिया निर्माण या समय पर काम पूरा नहीं करने की स्थिति में भुगतान रोका जाता है। ठेकेदार अपनी खामियां नहीं बताते, लेकिन घटिया निर्माण होने पर जवाबदेही निगम की होती है। जनता ठेकेदार को नहीं, निगम को जिम्मेदार मानती है।
स्कीम नंबर 54 की सड़क पर कार्रवाई
राठौर ने बताया कि हाल ही में तक उसका भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए आगे-पीछे ठेकेदार मिल जाते हैं।
‘ठेकेदार मिलना एक प्रक्रिया है। काम देर से हो, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। घटिया सड़क का भुगतान नहीं करेंगे।’
-राजेंद्र राठौर, एमआईसी सदस्य एंव जनकार्य प्रभारी
समय पर भुगतान नहीं मिलने से ठेकेदारों की पूंजी फंस जाती है। ऐसे में नए काम लेने का जोखिम बढ़ता है, यहीं कारण है कि काम से दूरी बनाना हमारी मजबूरी है।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 17 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




